Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

balkavita, poem

Balkavita television by mainudeen kohri

बाल कविता टेलीविजन   मैं  हूँ बच्चों   टेलीविजन । मेरा कोई  नहीं है सीजन ।। मैं चलता रहता हरदम । …


बाल कविता

टेलीविजन

 

Balkavita television by mainudeen kohri

मैं  हूँ बच्चों   टेलीविजन ।

मेरा कोई  नहीं है सीजन ।।

मैं चलता रहता हरदम ।

भुला देता हूँ सारे ग़म ।।

खबरें सुनो या नाटक देखो ।

अपनी पसंद के चैनल देखो ।।

कार्टून चाव से देखे बच्चे बूढ़े ।

नेताओं के भाषण सच्चे झूठे ।।

गीत – गज़ल- फिल्में बहस ।

खोज खबर देखें तहस नहस ।।

आओ देखें अजब गजब की बातें ।

मैं चलता ,दिन देखूं  ना रातें ।।

स्वरचित / अप्रकाशित रचनाएं

*मईनुदीन कोहरी नाचीज़ बीकानेरी


Related Posts

नकाब ओढ़े चेहरे

October 23, 2021

 नकाब ओढ़े चेहरे चुंकि फायदेमंद रहती हैं हिंसक व अराजक परिस्थितियां चुनावों में वोटों के ध्रुवीकरण के लिए, इसलिए ज्यादातर

हृदय के चाँद

October 23, 2021

 हृदय के चाँद                                  

Pahle se bhi jyada by Jitendra Kabir

October 23, 2021

 पहले से भी ज्यादा भ्रष्टाचार मुक्त भारत का नारा देकर सरकार बनाने वाले लोग जब खुद ही लिप्त रहें सारा

Sharad chandra kirne by Anita Sharma

October 23, 2021

 शरद-चंद्र-किरणें* ऐ तकदीर मेरी मुझको चाँद से मिला रही। इक चाँद आसमान में इक है मेरे पास भी। सितारों ने

Sharad purinima by Dr. indu kumari

October 23, 2021

 शीर्षक–शरद पूर्णिंमा  पूनम की रात आई प्रेम की बरसात लाई राधा संग मिल गोपियां कान्हा संग रास रचाई धरा अनुपम

Dhwaj trivarn hai chhane ko by Arun kumar sukla

October 23, 2021

 ध्वज त्रिवर्ण है छाने को, है उठी लालिमा पूरब से, नभ केसरिया कर जाने को। यह क्षण है दिग नभमण्डल

Leave a Comment