Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Balkavita ghar by mainudeen kohri

बाल कविता घर  घर ,गाँव – गली झूलेंगे झूले ।  नन्नी – नन्नी, प्यारी – प्यारी बेटियाँ ।।  झूलो के …


बाल कविता घर

Balkavita ghar by mainudeen kohri

 घर ,गाँव – गली झूलेंगे झूले ।

 नन्नी – नन्नी, प्यारी – प्यारी बेटियाँ ।। 

झूलो के संग बारी – बारी झूलें । 

हंसती-गाती छोटी-मोटी बेटियाँ ।।

 पेड़ – चौपाल पर सजेंगे ये झूले । 

मस्त – मस्त सी इतराती बेटियाँ ।।

 पापा-मम्मी घर-आँगन बाँधे झूले ।

 रिमझिम के संग नाचे गाए बेटियाँ ।।

 सावन की फूव्वारों के आनन्द ले झूले ।

 कभी खड़े-बैठे संग-संग झूले बेटियाँ ।। ========================= 

स्वरचित: मईनुदीन कोहरी


Related Posts

नफरत की आग

June 24, 2022

 नफरत की आग जितेन्द्र ‘कबीर’ आग! आग से बुझती नहीं कभी, बुझती है रेत या फिर पानी से, नफरत की

ईश्वर क्या है?

June 24, 2022

 ईश्वर क्या है? जितेन्द्र ‘कबीर’ एक उम्मीद है! कुछ अच्छा होने की, अपने जीवन में कठिनाइयों से जूझते इंसान के

ऐसे बदलाव नहीं आएंगे

June 24, 2022

 ऐसे बदलाव नहीं आएंगे जितेन्द्र ‘कबीर’ सिर्फ इसलिए कि हमें बुरा लगता है देखना… देश को दंगे-फसादों में जलते हुए,

कोई क्या कर पाएगा?

June 24, 2022

 कोई क्या कर पाएगा? जितेन्द्र ‘कबीर’ बहुत मेधावी होगा अगर किसी का बच्चा तो डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासनिक अधिकारी, खिलाड़ी या

दुनियादारी

June 24, 2022

 दुनियादारी जितेन्द्र ‘कबीर’ बड़े खुश थे सभी चुप रहा करते थे जब तक, जरा सी जुबान जो खोली तो शिकवे

लूट मची है लूट

June 24, 2022

 लूट मची है लूट जितेन्द्र ‘कबीर’ शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में जो छोटे-बड़े ‘कुकुरमुत्ते’ उग आए हैं अवसर पाकर,

PreviousNext

Leave a Comment