Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Balkavita ghar by mainudeen kohri

बाल कविता घर  घर ,गाँव – गली झूलेंगे झूले ।  नन्नी – नन्नी, प्यारी – प्यारी बेटियाँ ।।  झूलो के …


बाल कविता घर

Balkavita ghar by mainudeen kohri

 घर ,गाँव – गली झूलेंगे झूले ।

 नन्नी – नन्नी, प्यारी – प्यारी बेटियाँ ।। 

झूलो के संग बारी – बारी झूलें । 

हंसती-गाती छोटी-मोटी बेटियाँ ।।

 पेड़ – चौपाल पर सजेंगे ये झूले । 

मस्त – मस्त सी इतराती बेटियाँ ।।

 पापा-मम्मी घर-आँगन बाँधे झूले ।

 रिमझिम के संग नाचे गाए बेटियाँ ।।

 सावन की फूव्वारों के आनन्द ले झूले ।

 कभी खड़े-बैठे संग-संग झूले बेटियाँ ।। ========================= 

स्वरचित: मईनुदीन कोहरी


Related Posts

कविता- महिला राजनीति क्षमता निर्माण-एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी

December 20, 2021

कविता महिला राजनीति क्षमता निर्माण राष्ट्रीय महिला आयोग ने राजनीति में महिलाओं के लिए क्षमता निर्माण करनेशी इज ए किंग

मुबारक हो नया साल-अजय प्रसाद

December 19, 2021

मुबारक हो नया साल लो फ़िर से नया साल मुबारक हो ज़िंदगी ये खस्ताहाल मुबारक हो। बस चंद रोज की

माँ- R.S.meena Indian

December 19, 2021

कविता माँ मैं व्रत नहीं करता ,कहीं माँ जैसी सूरत नहीं । माँ बाप को भूल जाऊ,ऐसा कभी मुहूर्त नहीं

पता नही-अजय प्रसाद

December 18, 2021

“पता नहीं “ खुश हूँ मैं या खफ़ा पता नही दुआ हूँ के बददुआ पता नही । हलचल तो है

भान दक्षिणायन भए- विजय लक्ष्मी पाण्डेय

December 18, 2021

भान दक्षिणायन भए…!!! भान दक्षिणायन भए, शिशिर सरकारी।पछुआ बयार मोहे ,तीर सम लाग्यो है ।। बिकल बौराई मैं,थर-थर बदन काँप्यो।ऐसे

मैं चटख साँवरी….!- विजय लक्ष्मी पाण्डेय

December 18, 2021

मैं चटख साँवरी….!!! मैं चटख साँवरी, श्याम रंग मेरो..!!!मैं सज के सँवर के,जो निकलूँ ,तो क्या बात..? मैं बड़ी खूबसूरत,बड़ी

Leave a Comment