Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Bali ki bakari by Jitendra kabir

 बलि की बकरी एक चालाक आदमी एक आजाद घूमती बकरी को उसकी पसंदीदा घास का लालच देकर अपने बाड़े में …


 बलि की बकरी

Bali ki bakari by Jitendra kabir

एक चालाक आदमी

एक आजाद घूमती बकरी को

उसकी पसंदीदा घास का लालच देकर

अपने बाड़े में ले आया,

बकरी के चारे पानी का इंतजाम करके

फिर उसे अपना गुलाम बनाया,

बकरी का दूध निकाल थोड़ा खुद पिया

और थोड़ा बाजार में बेच आया,

बकरी के मल-मूत्र से

अपने खेतों को उपजाऊ बनाया,

बकरी के बालों से

पश्मीना बना खूब मुनाफा कमाया,

बकरी की वंशवृद्धि से

अपना बड़ा कारोबार चलाया,

और बकरी जब बूढ़ी हुई

तो काट कर उसको मांस बेच खाया,

यहां तक की उसकी 

खाल उतारकर आदमी ने अपने लिए

कई तरह का उपयोगी सामान बनाया,

हमारे लोकतंत्र में यह बकरी कौन है

और यह आदमी है कौन?

इस सवाल पर इस देश कर्णधार

रहते हैं हमेशा मौन।

                             जितेन्द्र ‘कबीर’

यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।

साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’

संप्रति- अध्यापक

पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश

संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

छोड़ दिए गये हैं मर जाने के लिए-जितेन्द्र ‘कबीर’

February 14, 2022

छोड़ दिए गये हैं मर जाने के लिए बहुत वक्त और संसाधन लग जातेकिसी देश के…इस कोरोना नामक महामारी कोपूरी

तोड़ा क्यों जाए?- जितेन्द्र ‘कबीर

February 14, 2022

तोड़ा क्यों जाए? गुलाब!तुम सलामत रहनाअपनी पत्तियों, टहनियों, जड़ों,परिवेश और वजूद के साथ,तुम्हारी महक और खूबसूरतीका इस्तेमाल नहीं करना है

विरोध के स्वप्न और इंसानी कायरता- जितेन्द्र ‘कबीर

February 14, 2022

विरोध के स्वप्न और इंसानी कायरता आज मेरे स्वप्न में..पेड़ों ने हड़ताल कीपरिंदों के आज़ादी सेआकाश में उड़ने परलगे प्रतिबंधों

मां शारदे वंदना- डॉ. इन्दु कुमारी

February 14, 2022

ओ शारदे मां ज्ञान ओ शारदे मां ज्ञान की गंगा बहा दे मांमैं हूं अज्ञानी नेह कीकृपा बरसाओ नातू ही

खुशियां दिखावे की- डॉ इंदु कुमारी

February 14, 2022

खुशियां दिखावे की ना तुम खुश हो ना हम खुश हैं यह खुशियां है दिखावे की यह जमाना है बड़े

बसंत की बहार- डॉ इंदु कुमारी

February 14, 2022

बसंत की बहार बसंत तेरे आगमन सेप्रकृति सजी दुल्हन सीनीलगगन नीलांबरजैसे श्याम वर्ण कान्हावस्त्र पहने हो पितांबरपीले रंगों में सरसों

Leave a Comment