बाल दिवस
आज नवाजेँ चालों अपने नौ निहालों को
सजाएं उनके जीवन को बचाएं उन्हे बालाओं से
सुख दुःख से कराएं उन्हे अवगत
बनाएं उन्हे सृहद परिजन
नादानियों के कांटों में पनपते इन फूलों को
गुलजार हमें बनाना हैं
इन्हे सीखाना हैं मानव बनना
मशीनों के बीच न बन के रह जाए वे मशिनें
आज के परिपेक्ष में भी उन्हें अपने ही संस्कारों को आगे बढ़ाना हैं
जगानी हैं एक अगन आगे बढ़ने की
ऐसी लगन को दिल में लगाना हैं
भूले नहीं हम सभी अपने फर्ज को
उन्हे भी यही पाठ पढ़ाना हैं
चले वो अपने ही धर्म कर्म पर
भूले न मानवता को
इस प्यारी पृथ्वी को उन्हे ही सजना हैं
बाल दिवस को आओं मनाएं
नए जमाने के तरीकों से
हट जाए भले हम पुरानी लकीरों से
पर न भूले अपने रिवाजों को


