Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Badduaon ke bhagidar by Jitendra Kabir

 बद्दुआओं के भागीदार दूसरों की नहीं कह सकता लेकिन अपने घर में मां ,बहन, बेटी और भी कई सारी महिलाओं …


 बद्दुआओं के भागीदार

Badduaon ke bhagidar by Jitendra Kabir

दूसरों की नहीं कह सकता

लेकिन अपने घर में

मां ,बहन, बेटी और भी कई सारी

महिलाओं की मौजूदगी ने मुझे

दुनिया की बाकी महिलाओं के

सम्मान, निजता, इच्छाओं

व जरूरतों के प्रति

संवेदनशील और सहनशील बनाया है।

महिलाओं के ऊपर क्रूरता 

बरतने वाले पुरुषों की जिंदगी में

रहा नहीं होता शायद

किसी महिला का सकारात्मक प्रभाव,

या फिर वो रहता है

अपने वेग पर नियंत्रण करने में नाकाम,

महिलाओं की कमजोर सामाजिक स्थिति का

फायदा उठाते हुए ऐसे पुरुष

उनका शोषण करने में होते तो हैं कामयाब

लेकिन मन से ऐसे लोगों को

महिलाओं ने कभी नहीं अपनाया है और

जी भर के उन्हें अपनी बद्दुआओं का

भागीदार बनाया है।

                                     जितेन्द्र ‘कबीर’

साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’

संप्रति – अध्यापक

पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश

संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

कविता -गँवईयत अच्छी लगी

June 23, 2022

 कविता -गँवईयत अच्छी लगी सिद्धार्थ गोरखपुरी माँ को न शहर अच्छा लगा न न शहर की शहरियत अच्छी लगी वो

कविता – बचपन पुराना रे

June 23, 2022

 कविता – बचपन पुराना रे सिद्धार्थ गोरखपुरी ढूंढ़ के ला दो कोई बचपन पुराना रे पुराना जमाना हाँ पुराना जमाना

ये ख्वाब न होते तो क्या होता?

June 23, 2022

 कविता – ये ख्वाब न होते तो क्या होता? सिद्धार्थ गोरखपुरी झोपड़ी में रहने वाले लोग जब थोड़े व्यथित हो जाते

रक्त की बूँद!!!!

June 23, 2022

 रक्त की बूँद!!!! अनिता शर्मा रक्त की हर बूंद कीमती,रक्तदान जरूरी है।कीमती हर जान रक्त से,रक्त दान जरूरी है। समय-समय

“श्रृंगार रस”

June 22, 2022

 “श्रृंगार रस” वो लम्हा किसी नाज़नीन के शृंगार सा बेइन्तहाँ आकर्षक होता है, जब कोई सनम अपने महबूब की बाँहों

खालसा-हरविंदर सिंह ”ग़ुलाम”’

June 5, 2022

 खालसा अंतर्मन में नाद उठा है  कैसा ये विस्माद उठा है  हिरण्य कश्यप के घर देखो  हरी भक्त प्रह्लाद उठा

PreviousNext

Leave a Comment