Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Badamashi Kavita by jayshree birmi

 बदमाशी आई बदमाश बौछरे,भिगोती हुए चौबारे, दौड़ के करो बंद खिड़की, उड़ती चुन्नी खिड़की के पल्ले में अटकी। दौड़ के …


 बदमाशी

Badamashi Kavita by jayshree birmi

आई बदमाश बौछरे,भिगोती हुए चौबारे,

दौड़ के करो बंद खिड़की,

उड़ती चुन्नी खिड़की के पल्ले में अटकी।

दौड़ के लिए सूखते  कपड़े समेट,

और दौड़ कर सिमटती सी भागी।

नहीं  छोड़ा उसने कुछ सुखा,

मेरा व्यवहार उससे हुआ रूखा।

गस्साई और  पटक के पैर,

सोचा उसे क्या हैं कपड़ों से बैर।

दो दिन नही धो पाई क्यों की बदरी थी छाई।

आज हिम्मत जुटाई और मशीन लगाई 

और

 आई बदमाश बौछारे

भिगोती हुई चौबारे।

समेटे कपड़े घर में सुखाए,

जैसे कदम के पेड़ लगाए।

बिन कनैया जैसे चिर हो चुराए,

घर ऐसे  ही भ्रांति लगाए।

नहीं यमुना तट ,नहीं कनैया,नहीं राधा और न गोपी वृंद

 फिर क्यूं घर मेरा  बन गया है फिर से कदम्ब  ।

जयश्री बिर्मी

निवृत्त शिक्षिका

अहमदाबाद


Related Posts

कलियुग का रामराज्य- जितेन्द्र ‘कबीर’

February 24, 2022

कलियुग का रामराज्य शालीनता भगवान राम का गुण थालेकिन उनकी धरती पर रामराज्यसोशल मीडिया पर दिन-रात गंदी अश्लील गालियांबकने वाले

तुम्हारा प्रेम मेरी दुनिया है- जितेन्द्र ‘ कबीर ‘

February 24, 2022

तुम्हारा प्रेम मेरी दुनिया है तुम्हारा प्रेम…मेरे लिए पुल सरीखा है,जिस पर चलकरनिकल जाता हूं मैं अक्सरखोजने प्रेम के गहनतम

करे कोई और भरे को- जितेन्द्र ‘कबीर’

February 24, 2022

करे कोई और भरे को खूब मुनाफा कमायाजिन लोगों नेअंधाधुंध खनन करकेनदियों और पहाड़ों में,इसके कारण हुएप्रकृति के कोप से

अपनी व्यथा किसे सुनाएं

February 24, 2022

अपनी व्यथा किसे सुनाएं अपनी व्यथा किसे सुनाऊं बात समझ ना आई दुखों का पहाड़ टूटा घर में वीरानी छाई

कविता मैं बहुत खुश था

February 24, 2022

कवितामैं बहुत खुश था मैं बहुत ख़ुश था जब मेरे माता-पिता बहन हयात थे मुझे कोई फ़िक्र जिम्मेदारी चिंता नहीं

Sundar bachpan Raunak Agrawal

February 17, 2022

सुंदर बचपन !! सोनी सी मुस्कान है वो, हर माँ की जान है वो !!ये बच्चे मन के सच्चे,थोड़े कच्चे

Leave a Comment