Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Badal rahi hai phir bhi duniya by Jitendra Kabir

 बदल रही है फिर भी दुनिया दुनिया अक्सर खिलाफ रही है नये बदलाव के, नयी सोच को किया जाता रहा …


 बदल रही है फिर भी दुनिया

Badal rahi hai phir bhi duniya by Jitendra Kabir

दुनिया अक्सर खिलाफ रही है

नये बदलाव के,

नयी सोच को किया जाता रहा है

यहां हतोत्साहित,

स्थापित ढर्रे पर ही चलने की ज़िद्द

रही है इसकी,

फिर भी, बदली है यह समय के हाथों

मजबूर होकर

और नये एवं प्रासंगिक विचारों की

यही सफलता है।

दुनिया वालों का अक्सर विश्वास रहा है

भेड़ चाल में,

अलग रास्ता अपनाने वालों का बहुधा

उड़ाया जाता रहा है मजाक,

दूसरे लोगों की देखा-देखी करने की ही

प्रवृत्ति रही है इसकी,

फिर भी, बहुत से लोगों ने खोले हैं 

नये क्षितिज के द्वार

और नवीन राहों के अन्वेषण की इन्सानी

जिज्ञासा की यही सफलता है।

                                  जितेन्द्र ‘कबीर’

यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।

साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’

संप्रति – अध्यापक

पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश

संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

Kavita kaisa dharm tumhara by kamal siwani

July 3, 2021

 कैसा धर्म तुम्हारा ? कहाँ से तूने अपनाए , जीवन का अजब पहाड़ा ? एक दूजे में भेद तू करते,

Kavita kyu aapas me ladna by kamal siwani

July 3, 2021

 क्यूँ आपस में लड़ना ? जाति -धर्म के नाम पर नित दिन, क्योंकर रार मचाते ? हर मानव एक ही

banega apna Desh mahan by Jitendra kabir

July 3, 2021

 बनेगा अपना देश महान कल तक थे जो चोर–बेईमान, वो बन गये हैं रातों–रात ही बड़े शरीफ इंसान, अवसरवादियों को

Yadon ka tarana by kalpana kumari

July 3, 2021

यादों का तराना *** इस कदर सजाया है तेरी यादों को, कि मेरा आशियाना बन चुका है, इन्हीं आशियाने में,

Kaise puja? By kamal siwani bihar

July 3, 2021

 कैसी पूजा ? दया – प्रेम ना उर अंतर में , और पूजा पत्थर की । हे मानव यह कैसी

Parwah kaun karen by kalpana kumari

July 3, 2021

व्यंग्य-कवितापरवाह कौन करे जो स्वत: मिल रहा जीवन में, उसकी परवाह कौन करे। आती सांसे जाती सांसे, सांसो पर जो

Leave a Comment