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azadi aur hm-lekh

azadi aur hm-lekh आज मौजूदा देश की हालात देखते हुए यह लिखना पड़ रहा है की ग्राम प्रधान से लेकर …


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आज मौजूदा देश की हालात देखते हुए यह लिखना पड़ रहा है की ग्राम प्रधान से लेकर प्रधानमंत्री राष्ट्रपति तक की शैक्षिक योग्यता तय होना चाहिए ।

आम जनता राजनेताओं द्वारा जिस तरह से विकास के नाम पर ठगी  जा रही  है। देश की अर्थव्यवस्था जिस तरह से गर्त में जा रही है । उससे यह साफ  मालूम पड़ रहा है कि उन राजनेताओं में देश संचालन की योग्यता ही नहीं है । जैसा कि आप सब जानते हैं कि भारत गाँवों  में बसता है जब गाँव  के प्रधान की योग्यता तय होगी तभी गाँव के मूर्खतापूर्ण राजनीति में सुधार होगा मेरा तो मानना है कि ग्राम प्रधान की कम से कम योग्यता स्नातक होना चाहिए ।  स्नातक के नीचे जो भी शिक्षा ग्रहण किया हो वह प्रधान पद के लिए अमान्य होना चाहिए । ऐसे ही प्रधानमंत्री राष्ट्रपति शिक्षा मंत्री आदि सभी की शैक्षिक योग्यता  परास्नातक व पीएचडी होना चाहिए ।

आज पैसे के बल पर मूर्ख से मूर्ख लोग यहां तक कि चाय बेचने वाले भी प्रधानमंत्री बन जा रहा हैं तो देश आगे जाएगा या पीछे आप सब समझदार हैं समझ सकते हैं एक और बात अपने देश में वोट देने का अधिकार आयु से नहीं बल्कि शैक्षिक योग्यता वह भी स्नातक होना चाहिए क्योंकि जब देश के युवा वह भी जो स्नातक हैं शिक्षित हैं जिन जिन के अंदर भविष्य का समझ है जब वह व्यक्ति किसी नेता को किसी पद के लिए चुनेगा तो वह भाई भतीजावाद या जाति धर्म से उलझ कर नहीं बल्कि वह निष्पक्ष और योग व्यक्ति को चुनेगा ।  आज के राजनेता तो आम जनता को जो कम पढ़े लिखे हैं उनको अपने जुमले में फंसा कर जीत जाते हैं यही कारण है कि भारत में अयोग्य व्यक्ति जनता द्वारा चुन लिया जाता है।  क्योंकि जो स्नातक हैं उनकी संख्या कम है वह चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं हालांकि लोकतंत्र का हनन तो होगा |

लेकिन इसमें भी परिवर्तन करने की जरूरत है  । लोकतंत्र का सबसे ज्यादा लाभ तो राजनेता ही ले रहे हैं । आम जनता को लोकतंत्र के नाम पर ठगा जाता है साथ ही राजनीतिक पदों पर खड़े होने के लिए चाहे वह ग्राम प्रधान हो या प्रधानमंत्री उसके लिए एक चुनाव आयोग को टीम बनाना चाहिए और एक  साल पहले उनका परीक्षा लेनी चाहिए यदि वह परीक्षा में पास होता है तो उसका विशेषज्ञों द्वारा इंटरव्यू लेना चाहिए उसके बाद जो व्यक्ति पास होकर आता है उसे चुनाव में खड़े होने की अनुमति दिया जाए किंतु भारत में देखा जाए तो एक सामान्य नौकरी से लेकर आईएएस पीसीएस आदि पदों के लिए क्या-क्या नियम कानून नहीं बने हैं मेरा मानना है कि जब जिला चलाने वाले के लिए अर्थात एक Dm के पद के लिए  इतना बेहतर तरीके से परीक्षा व  इंटरव्यू हो रहा है तो राज्य या देश चलाने के लिए क्यों नहीं? यह  आम जनता व शिक्षित युवा के साथ नाइंसाफी है सभी के लिए कुछ ना कुछ योग्यता निर्धारित होना चाहिए तभी अपने देश का कुछ विकास संभव है यदि अन्य देशों से भारत की तुलना की जाती है या हमारे मूर्ख राजनेता मूर्ख बनाने के लिए तुलना करते हैं तो हम वहा फूले नहीं समाते लेकिन यहां समझने की बात यह है कि अन्य देश की शिक्षा से तुलना करो तब तुम्हें पता चले कि हम कहां हैं और क्या हैं   किंतु यहां तो सिर्फ मूर्ख बनाना है अंग्रेजों ने फूट डालो राज करो का नियम अपनाया तो भारतीय नेताओं ने जात धर्म में बांटो और राज करो अपनाया है समय और प्रकृति परिवर्तनशील है|

 आज हम लोगों को भी देश हित के लिए संकल्पित और एक होना पड़ेगा तभी परिवर्तन संभव है नहीं तो बस यही होगा 5 साल इसे भी देख लें 5 साल इसे भी देख ले यही करते-करते आज आजादी के 70 साल हो गए किंतु देश का अन्नदाता किसान मजदूर वर्ग जैसा पहले था आज भी वैसा ही है पहले भी कर्ज में था और आज भी मेरा मानना है कि भारत का विकास तभी संभव है जब शिक्षा स्वास्थ्य मुक्त किया जाए सभी वर्गों के लिए किंतु यहां तो करोना काल में विद्यालय, विश्वविद्यालय बंद है किंतु मदिरालय भारत सरकार की अनुमति से 12 घंटे खुले हैं। वह भी तब जब देश में लाक  डाउन  लागा हो   तब शिक्षित ही नहीं आम जन समूह यह समझ सकता है कि पैसे के लिए सरकार कितना गिर सकती है |

 ऐसे राजनेताओं से कुछ भी उम्मीद करना अपने पैरों में कुल्हाड़ी मारना है देश के  समाज में यदि परिवर्तन लाना है तो ऐसे राजनेताओं व  सरकार का बहिष्कार कर देना चाहिए । लोकसभा या राज्यसभा सिर्फ और  सिर्फ पीएचडी धारक वह प्रोफ़ेसर ही होना चाहिए जो अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ होते हैं जब अलग-अलग विशेषज्ञ एक साथ मिलकर कुछ काम करेंगे तभी विकास संभव है ।

कभी हमारा देश सोने की चिड़िया कहा जाता था किंतु आज देश की अर्थव्यवस्था माइनस में है इसके लूटने खाने वाले पहले जो थे अब तो वह नहीं रहे किंतु उन्हीं के गुणसूत्रों वाले भारतीय राजनेता आज भी उन्हीं लोगों की तरह देश को गर्त में ले जा रहे हैं विकास के नाम पर बकवास जुमलेबाजी कर रहे हैं अंततः मैं यही कहना चाहूंगा कि मेरे प्यारे देशवासियों जब तक हम जाति और धर्म में बटे  रहेंगे तब तक राजनीतिक पार्टियां हम सबकी स्वतंत्रता का हनन करते हम पर राज करेंगे |

जिस दिन हम सब  स्वतंत्र,  निष्पक्ष , जाति धर्म से ऊपर उठकर,अपने कर्तव्यों एवं अधिकारों का पालन करना प्रारम्भ कर देंगे‌,उस दिन से देश में परिवर्तन होना प्रारम्भ हो जायेगा |

अपने कर्तव्यों एवं अधिकारों को समझने के लिए देश के प्रत्येक व्यक्ति के घर में भारत का संविधान जरूर उपलब्ध होना चाहिए 

सिर्फ उपलब्ध ही नहीं बल्कि उसका गहन अध्ययन भी करना चाहिए ताकि किसी भी कार्यालय पुलिस थाने किसी ऑफिस में जाने पर आपको कोई भी व्यक्ति डांट कर भगाए ना बल्कि नियमानुसार आपका काम करें यह तब संभव है जब आप अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों का जानकारी रखेंगे भारतीय संविधान एक ऐसा संविधान है जिसका जिसके नाम में ही अर्थ छुपा हुआ है

सम मतलब बराबर विधान मतलब कानून या विधि अर्थात संविधान का यह अर्थ हुआ कि वह पुस्तक जिसमें सभी के लिए समान कानून या विधि लागू हो उसे संविधान कहते हैं |

आज देश में जिस तरह से हालात बने हुए हैं किसानों पर जिस तरह से अत्याचार किया जा रहा है यह बहुत ही निंदनीय कार्य है और निंदनीय इसलिए भी है कि जो देश के हित के लिए देश का पेट पालने के लिए दिन रात खेतों में कड़ी मेहनत कर अन्न उपजाता है  उस पर भारत माता के सपूत लाठी और डंडे से वार कर रहे हैं  |

यह सरकार की तानाशाही  है अच्छे दिन के नाम पर महंगाई इस कदर बढ़ा  दी गई है लोगों के बुरे दिन आ गए हैं और सरकार के अच्छे दिन |

अंततः मैं यही कहना चाहूंगा कि जब तक हम बटे रहेंगे पुराने कपड़े की तरह फटे रहेंगे |


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