Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

avani kavita by anita sharma jhasi

अवनी चहक रहे खग वृन्द सभी  झूम रही लतिका उपवन में। शीतल हवा बही सुखदाई अनुपम छटा मनोहर छाई। * …


अवनी

avani kavita by anita sharma jhasi

चहक रहे खग वृन्द सभी 

झूम रही लतिका उपवन में।

शीतल हवा बही सुखदाई

अनुपम छटा मनोहर छाई।

*

अवनी तरूणी लावण्य रूप

नव युवती सा शृंगार सजाया।

धानी सी चुनरी ओढ़ कर

सकुचाई और शरमाई।

*

कुसुम मधुर सुगंधित खिलकर

महकाते अन्तर्मन खुशबू से।

भर उठती खुशियां मुखरित

खिल उठते चेहरे मुस्काकर।

*

आसमान पर श्याम व्योम हैं,

बूँदों से मोती बरसाते शीतल।

दामिनी रह-रह चमक रही ,

बादल घन-घन घड़-घड़ाते ।

*

झूम झूम बरसो रे मेघा बरसो,

तर कर दो धरती का आँचल ।

सुख भर दो चहुँ ओर धरा पर,

नदिया सरोवर जल सराबोर करो ।

*

दसों दिशाओं से शीतलता के,

मधुर संगीत सुरों के भर दो।

काले मेघों बरसो रे मेघा बरसो,

हरित करो धरती का कण-कण।

*

मनुज हृदय संतुष्टि से तृप्त करो,

वैभव धरा में हो जग सुखी हो।

हर जीवो पर दया दृष्टि से हाथ धरो,

सुख के इन्द्रधनुष से सात रंग हो।

*

धरती अम्बर एक रंग क्षितिज पर,

मनोहर मधुर रूप छाया हो ।

खग मृग वृन्द चराचर झूमें गायें ,

ऐसा गीत मनोहर भर दो, जग गाये।।


Related Posts

jitendra kabir ki kavitayien champa hp

July 23, 2021

जितेंद्र  कबीर की कविताएँ   इंसान को इंसान से तो मिलाया होशो-हवास में अक्सर दूसरे धर्म के लोगों के खिलाफ नफरत

Meri abhilasha kavita by sudhir Srivastava

July 23, 2021

 मेरी अभिलाषा मेरे मन की यह अभिलाषा पूरी हो जन जन की आषा, मिटे गरीबी और निराशा संस्कार बन जाये

Yadon ka sahara by hare Krishna Mishra

July 23, 2021

 यादों का सहारा अपराधी मैं तेरा हूं , सजा चाहे जो भी दो, नहीं शिकवा नहीं गिला, आंशू तो हमारे

tum mere ho kavita by Anita Sharma jhasi

July 23, 2021

 तुम मेरे हो कहाँ खो गये गिरधारी। मोर मुकुट,बंसीवाले। ग्वाले ,गोपियाँ सब रीझे, पर….तुम मेरे हो गिरधारी। कब से बाँट

Ganga kavita by anita sharma jhasi

July 23, 2021

 गंगा तू कितनी निर्मल है,तू कितनी पावन है। अमृत की धारा है,कि पुण्य फल दाता है। कितनो के माँ पाप

beshumar pyar kavita by anita sharma jhasi

July 23, 2021

  बेशुमार प्यार तुम को हम बतलाये कैसे, बेशुमार प्यार हम करते हैं। तुम बिन जीवन जीने का, स्वप्न में

Leave a Comment