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antarjateey vivah aur honor killing ki samasya

 अंतरजातीय विवाह और ऑनर किलिंग की समस्या :  इस आधुनिक और भागती दौड़ती जिंदगी में भी जहाँ किसी के पास …


 अंतरजातीय विवाह और ऑनर किलिंग की समस्या : 

antarjateey vivah aur honor killing ki samasya

इस आधुनिक और भागती दौड़ती जिंदगी में भी जहाँ किसी के पास किसी के लिए समय नही होता वहाँ आज भी अंतर्जातीय विवाह में ऑनर किलिंग इंसान की रूढ़िवादी सोच और कुप्रथा को दर्शाता है । इंसान इसमें इस तरह खुद को जकड़े है कि वो जानबूझकर इस कुप्रथा को छोड़ना नही चाहता है।बात करते हैं अंतरजातीय विवाह की तो आज भी ये लोगो के लिए समस्या ही है चाहे वो गाँव मे हो या शहर में , पढ़े लिखे लोग हो या अनपढ़ ।

दो लोगो का अपनी जाति से बाहर विवाह किस तरह से समाज के लिए हानिकर हो सकता है इसका आज तक उचित और न्यायसंगत तार्किकता के आधार पर कोई जवाब नही देता । अंतरजातीय विवाह के मामले ज्यादातर प्रेम मे देखने को मिलते हैं जहाँ लोग स्वेछा से एक दूसरे को जान समझ एक दूसरे की कमी और गुण के साथ एक दूसरे को अपनाते हैं अर्थात विवाह कर लेते हैं वहीं अंतरजातीय विवाह करने से परिवार के भाई और बाप ही अपने बच्चों की अपनी झूठी शान और खोखली संस्कृति के नाम पर जान ले लेते हैं ।

आज भी भारत जैसे देश मे जहाँ एक दलित कोई बड़ा अधिकारी हो पर अपनी बारात वो उच्च घरानों की गलियों से लेकर नही जा सकता ..ऐसा करने पर उच्च वर्ग इसे अपने शान के खिलाफ समझ एक दूसरे के जान के दुश्मन बन जाते हैं और फिर होती है हत्याएं । जहाँ बारात को सिर्फ गली से गुजरने को लेकर हत्या हो सकती है वहां आप समझ सकते हैं कि जाति के नाम पर अंतरजातीय विवाह की यहाँ कितनी भयानक और दर्दनाक समस्या है ।

अंतरजातीय विवाह का मुख्य कारण यहीं हैं “जाति” वो हमसे कितना नीचे है हम कितना ऊपर है समाज मे क्या इज्जत रह जाएगी ।

अंतरजातीय विवाह में होने वाली हत्या या ऑनर किलिंग को आप मात्र अशिक्षा का नाम नही दे सकते इसे अशिक्षा का जामा पहनाना अतार्किक और असंगत होगा। क्योंकि बड़े बड़े घराने इसकी जद में आज भी है जो उच्च शिक्षा के बाद भी जागरुक नही है आज भी अपने कुरीतियों से अपनी कुसंस्कृति से जकड़े हुए हैं जहाँ लोग अपनी झूठी प्रतिष्ठा के लिए अपने ही बच्चों को गला रेत कर दर्दनाक तरीके से मौत के घाट उतार देते हैं और जरा भी अफसोस नही करते अपने कुकृत्य और अपनी दानवता पर ।

ये गरीब और अमीर दोनो ही तबकों में समान रूप से व्याप्त हो रखी समस्या है । जब तक समाज से जाति की समस्या नही जाती जब तक ये ऊंच नीच की खाई बनी रहेगी तब तक असंभव सा है इस अंतरजातीय विवाह में लोगो की बलि चढ़ने से रुकने का क्रम ।

जब तक अपने खोखले पंरपरा और संस्कृति के नाम पर आप लोगो को छूत और मलिन मानते रहेंगे तब तक ये समस्या का निदान संभव नही है ।

कड़े कानून के होने के बावजूद लोग जब अपने झूठे और दिखावे के लिए अपने ही बच्चों की बलि चढ़ाने लगे तब सिर्फ जागरूकता और इंसानियत ही उन्हें सही ग़लत में फर्क सीखा सकती है अन्यथा लोगो की जाने मात्र ढोंगी संस्कृति की वजह से जाती रहेगी।

जरूरी है जाति से ऊपर उठकर इंसान बन कर सोचे कुसंस्कृति और रूढ़िवादी विचारधारा को छोड़ प्रोग्रेसिव बने दिखावे के पुतले नही ।

@प्रिया गौड़


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