Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Ann ki barbadi rokne ka sabak by jitendra kabir

 अन्न की बर्बादी रोकने का सबक देखता हूं जब-जब मैं अपने घर के बच्चों को  आवश्यकता से अधिक भोजन लेकर …


 अन्न की बर्बादी रोकने का सबक

Ann ki barbadi rokne ka sabak by jitendra kabir

देखता हूं जब-जब मैं

अपने घर के बच्चों को 

आवश्यकता से अधिक भोजन लेकर

फिर उसे जूठा छोड़ बर्बाद करते हुए,

तो बरबस याद आ जाता है 

मुझे अपना बचपन

डांट पड़ जाती थी जब बुजुर्गों से

अगर थाली से अन्न का एक दाना भी 

कभी जो बाहर गिरे,

आंखों की भूख करने के दण्डस्वरूप जब

अक्सर दिखाया जाता था भविष्य में

भूखों मरने के श्राप का भय,

अन्न की सही कद्र करने का सबक

भले ही सीखा था हमनें

मन ही मन अपने बुजुर्गों की

कृपणता को कोसते हुए,

लेकिन बड़े हुए तो अहसास हुआ

कि कितने सही थे वो अपनी जगह

देखा जब दुनिया में लोगों को 

रोटी के एक-एक टुकड़े के लिए तरसते हुए,

लड़ते-झगड़ते हुए,

आज देखता हूं मैं जब किसी को

अपना भोजन बर्बाद करते हुए 

तो दुःख होता है 

कि अपनी तथाकथित साधन-संपन्नता

के दंभ में

या फिर ज्यादा लाड़-प्यार के चक्कर में

हममें से बहुत लोग 

सिखाते नहीं अपने बच्चों को जिंदगी का

एक बड़ा महत्त्वपूर्ण सबक यह।

                                      जितेन्द्र ‘कबीर’

यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।

साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’

संप्रति – अध्यापक

पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश

संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

सही मात्रा

September 28, 2022

सही मात्रा मर जातें हैं बूंद भरमेंजी लेते हैं पी हलाहललंबी उम्र जी जाते हैंसुन तानों का जहरजहर तेरी फितरत

अदृश्य प्रलय

September 27, 2022

अदृश्य प्रलय चल रहा एक अदृश्य प्रलयजो न जग को दृष्टिमान होता,सब सजग मधु रागिनी मेंसुप्त होता लुप्त होता।तड़ित ने

हौसलों की उड़ान। (Poem)

September 27, 2022

हौसलों की उड़ान। चलो भरे हौसले की उड़ान,पार करें हर इम्तिहान,खुद से वादा करकेकरें स्वयं की बात का सम्मान। हमारा

जज़्बा जांबाज़ी भी पूंजी है हमारी

September 26, 2022

              कविता(poem) जज़्बा जांबाज़ी भी पूंजी है हमारी वित्तीय हालत ख़राब है तो क्या हुआ

पापा मैं बोझ नहीं

September 24, 2022

विश्व बालिका दिवस पर विशेष 💓 पापा मैं बोझ नहीं 💓 मम्मी – पापा मैं बेटी हूँ आपकीपर , क्या

पिता के लिए कोई शब्द नहीं

September 22, 2022

कविता पिता के लिए कोई शब्द नहीं पिता की ज्ञानवर्धक बातों को अनुशासन से समझते नहींपिता के लिए कोई शब्द

PreviousNext

Leave a Comment