Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Anant path by madhushri maharashtra

अनंत पथ ओ पथिक अनंत पथ केछोड़ उठ चल कुछ न अपनाजो भी था तेरा नहीउद्भ्रांत जग का था सपनाअब …


अनंत पथ

Anant path by madhushri maharashtra

ओ पथिक अनंत पथ के
छोड़ उठ चल कुछ न अपना
जो भी था तेरा नही
उद्भ्रांत जग का था सपना
अब न तेरा ठाँव कोई
ना ही कोई गांव है ।
आभासी चंद्रिका थी झूठी
नेह तारों से भी टूटी
ताल के तट पुतिन छूटे
हिय धरा अनुबंध टूटे
तपते सूरज की चदरिया
अब तो ठंडी छांव है ।
निशि गुज़रती है कहीं
वासर का ठिकाना नहीं
सुख का सूरज डूबता तो
दुख का बहाना नहीं
भेद से अभेद तक
गतिशून्य होती चाह है ।
क्षितिज की नव कल्पना में
खुल रहा अमरत्व पथ
दृष्टि धुँधली खोजती
नवभोर को अबरान्त तक
घन तिमिर में चमकती नित
सत्य की निज राह है।

मधु श्री
मुम्बई महाराष्ट्र

@सर्वाधिकार सुरक्षित


Related Posts

ईमानदारी से छोड़ दो भ्रष्टाचार!!!

March 25, 2022

ईमानदारी से छोड़ दो भ्रष्टाचार!!! भारत में अब आ गई है नवाचारों की बौछार डिजिटल पारदर्शी नीतियों से हो गए

कविता -मां की ममता

March 25, 2022

कविता-मां की ममता मां की ममता मिलती हैं सबको कोई अच्छूता नहींकद्र करने की बात है, कोई करता कोई नहीं मां

भाषा सर्टिफिकेट सेल्फी अभियान

March 25, 2022

कविताभाषा सर्टिफिकेट सेल्फी अभियान सांस्कृतिक विविधता को प्रोत्साहन करने बहुभाषावाद को बढ़ावा देने एक भारत श्रेष्ठ भारत का प्रसार करने

सुकूँ चाहता है-सिद्धार्थ गोरखपुरी

March 25, 2022

सुकूँ चाहता है ठिकाना बदलना जो तूँ चाहता है जमाने से क्या तूँ सुकूँ चाहता है?जमाना बुरा है तूँ कहता

नारी- डॉ. इन्दु कुमारी

March 25, 2022

नारी क्या है तेरी लाचारी क्यों बनती तू बेचारीरिश्तो को निभाती आईजैसे बदन को ढकती साड़ीनारी !नारी!!ओ नारीस्व को मिटाने

ईमानदारी कविता -जयश्री बिरमी

February 24, 2022

ईमानदारी कहां कहां ढूंढू तुझे बता दे जराढूंढा तुझे गांव गांव और गली गलीढूंढने के लिए तुझे मैं तो शहर

Leave a Comment