Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Acche insan ki pahchan by Jitendra kabir

 अच्छे इंसान की पहचान खुद के लिए हो अच्छा सबसे पहले एक इंसान, हो सके जहां तक रखे अपने शरीर …


 अच्छे इंसान की पहचान

Acche insan ki pahchan by Jitendra kabir

खुद के लिए हो अच्छा

सबसे पहले एक इंसान,

हो सके जहां तक

रखे अपने शरीर का ध्यान,

उन चीजों से रहे दूर भरसक

पहुंचा सकती हों जो नुकसान,

अच्छे विचारों का लगातार

मन में अपने करता रहे संधान,

ज्ञानी लोगों की संगत करके

क्षमता अनुसार ग्रहण करे ज्ञान,

उसके बाद हो अच्छा

अपने परिवार के प्रति इंसान,

उनकी जरूरतें समझते हुए

इच्छाओं को दे उचित मान,

भावनात्मक रूप से जुड़ाव हो

जैसे शरीर कई, एक हो जान,

पड़ोसियों, रिश्तेदारों के लिए भी

उसके मन में हो सम्मान,

खुशियों में शामिल खुले मन से

गमों में बने उनका निगहबान,

इसी क्रम में अपने राज्य, देश,

एवं विश्व समुदाय के लिए

हो कल्याणकारी उसका विधान,

तभी करेगा अपने जन्म को सार्थक

बनेगा एक विश्व नागरिक महान,

खुद के लिए, परिवार के लिए,

अपने आस-पड़ोस के लिए

अच्छा जो न हो इंसान,

देश-दुनिया के लिए उसका 

अच्छा होना कदापि नहीं आसान।

                            जितेन्द्र ‘कबीर’

यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।

साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’

संप्रति – अध्यापक

पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश

संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

Man mastishk kavita by Anita Sharma

August 6, 2021

 मन-मस्तिष्क मन-मस्तिष्क में उमड़ते-घुमड़ते, विचारों की शृंखला। कितनी उलझी-सुलझी गुत्थियां , उठते-गिरते विचार । *** कितनी लहरें सुख-दुःख की समांई

Meghmala kavita by dr. H.K Mishra

August 6, 2021

 मेघमाला आते जाते देखा है अपनो को , सुख दुख को देखा जीवन में , राह नया कुछ रचती चल

Tanashahi pravitti kavita by Jitendra Kabir

August 6, 2021

 तानाशाही प्रवृत्ति हर कोई चाहता है कि सहमत हों, सब उसके विचारों  और कर्मों से, उसके मन-मुताबिक ही दुनिया चले,

Sochne se kuch nahi hoga by Jitendra kabir

August 6, 2021

 सोचने से कुछ नहीं होगा जब तक रहेगा कोई नया, अच्छा व क्रांतिकारी विचार हमारे दिमाग में ही, व्यवहारिक रूप

Beti ki taqat kavita by Sudhir Shrivastava

August 6, 2021

 बेटी की ताकत बिटिया मैंनें जन्मा है तुझे तेरा जीवन भी संवारुँगी, पढ़ा लिखाकर काबिल बनाऊँगी तुझे तेरी पहचान दिलाऊँगी,

Premchand samaj ke chitere by Indu kumari

August 4, 2021

 प्रेमचंद समाज के चितेरे गोरी सुरत घनी भौहें नाक नुकीले छोटी आँखें गुच्छी हुई बड़ी- बड़ी मूछें प्यारी मुस्कान चेहरे

Leave a Comment