Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Abki kranti gulabi ho jaye by Jitendra Kabir

 अबकी क्रांति गुलाबी हो जाए बंदिशें,धमकियां,फिकरे,फब्तियां, सहती, सुनती रही हो सदियों से, अबके कार्रवाई जवाबी हो जाए, तोड़ दे घमंड …


 अबकी क्रांति गुलाबी हो जाए

Abki kranti gulabi  ho jaye by Jitendra Kabir

बंदिशें,धमकियां,फिकरे,फब्तियां,

सहती, सुनती रही हो सदियों से,

अबके कार्रवाई जवाबी हो जाए,

तोड़ दे घमंड अत्याचारी का

अबकी क्रांति ‘गुलाबी’ हो जाए।

दुराचार, हत्या,गुलामी, बदनामी,

तेरे हिस्से आई है सदियों से,

अबके पलटवार जवाबी हो जाए,

गला दे हड्डियों को हत्यारे की

अबकी क्रांति ‘तेजाबी’ हो जाए।

इंतजार ना कर किसी मसीहा का,

अपने आप में ही हिम्मत जगा,

अबके प्रहार जवाबी हो जाए,

गलत करने का सोचे भी न कोई

अबकी क्रांति ‘इंकलाबी’ हो जाए 

 जितेन्द्र ‘कबीर’
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति- अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

अनंत यात्रा

June 24, 2022

 अनंत यात्रा सुधीर श्रीवास्तव शून्य से शिखर तक जीवन की गतिमान यात्रा खुद को श्रेष्ठ से श्रेष्ठतर होने का दंभ

कदम

June 24, 2022

 कदम सुधीर श्रीवास्तव हमें लगता है कि हमारे कदम किसी और को  प्रभावित नहीं करते , पर सच तो यह

व्यंग्य स्वार्थ के घोड़े

June 24, 2022

 व्यंग्यस्वार्थ के घोड़े सुधीर श्रीवास्तव आजकल का यही जमाना अंधे को दर्पण दिखलाना, बेंच देते गंजे को कंघा देखो! कैसा

डरने लगा हूँ मैं

June 24, 2022

 डरने लगा हूँ मैं सुधीर श्रीवास्तव वो छोटा होकर  कितना बड़ा हो गया है, बड़ा होकर भी बहुत छोटा हो

परिस्थितियां

June 24, 2022

 परिस्थितियां सुधीर श्रीवास्तव जीवन है तो परिस्थितियों से दो चार होना ही पड़ता है, अनुकूल हो या प्रतिकूल हमें सहना

मजदूरों का मान

June 24, 2022

 मजदूरों का मान सुधीर श्रीवास्तव माना कि हम मजदूर हैं पर मेहनत से जी नहीं चुराते, अपने काम में समर्पित

PreviousNext

Leave a Comment