abhilasha poem by abhilekha ambasth gazipur
अभिलाषा अधरों पे मुस्कान लिए, शहरों में अब गांव मिले, मधुर वाणी की सरगम में, शहरों में अब गांव पले, …
शहरों में अब गांव मिले,
मधुर वाणी की सरगम में,
शहरों में अब गांव पले,
चहुं ओर हो हरितिमा,
हर ओर हो सुहावना,
करें हम कल्पना, कल हो पूर्ण सपना ,
अधरों पे मुस्कान लिए,
शहरों में अब गांव पले,
हाथ लकुटिया थाम कर,
शहरों में अब गांव चले ,
राम लखन की जोड़ी ,
अब सीता को संभाल रखें,
रावण ना कोई पैदा हो,
बस हनुमान सा दास मिले,
हैं अभिलाषा यही हमारी,
कविता को सम्मान मिले,
अभिलेखा की लेखनी,
नित नये आयाम लिखे,
जन जन तक पहुंचाऊं , संदेश,
लौट चलो अब अपने देश,
नहीं है ख्वाब कुछ पाने का,
बस यही है मेरा संदेश ।
अभिलेखा अम्बष्ट ,
स्वरचित, रचना
गाजीपुर
Related Posts
kavita – Gyani abhimani mosam khan alwar
May 30, 2021
अज्ञानी अभिमानी सबसे अच्छा है तू इंसान , सबसे ज्यादा है तेरा सम्मान,, पल भर की ये तेरी
Kavita – Maa -pawan kumar yadav
May 29, 2021
कविता – मॉं धन्य है ! मॉं धन्य मॉं की ममता । नौ मास मुझको, रखा गर्भ के भीतर ।
Tum thi khusahal the hm
May 9, 2021
ग़ज़ल बहुत खुशी कुछ गम भी हैतेरे यादों में डूबे हम भी है तुम थी खुशहाल थे हम तेरे जाने
Tum ho meri mohabat rahogi meri
March 5, 2021
Tum ho meri mohabat rahogi meri बारिशों के बूँद सा टपकता रहातुम भी रोती रही मैं भी रोता रहाप्यार तुझको
