Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

abhilasha poem by abhilekha ambasth gazipur

अभिलाषा अधरों पे मुस्कान लिए,  शहरों में अब गांव मिले,  मधुर वाणी की सरगम में,  शहरों में अब गांव पले,  …


अभिलाषा

abhilasha poem by abhilekha ambasth gazipur
अधरों पे मुस्कान लिए, 

शहरों में अब गांव मिले, 
मधुर वाणी की सरगम में, 
शहरों में अब गांव पले, 
चहुं ओर हो हरितिमा, 
हर ओर हो सुहावना, 
करें हम कल्पना, कल हो पूर्ण सपना , 
अधरों पे मुस्कान लिए, 
शहरों में अब गांव पले, 
हाथ लकुटिया थाम कर, 
शहरों में अब गांव चले , 
राम लखन की जोड़ी , 
अब सीता को संभाल रखें, 
रावण ना कोई पैदा हो, 
बस हनुमान सा दास मिले, 
हैं अभिलाषा यही हमारी, 
कविता को सम्मान मिले, 
अभिलेखा की लेखनी, 
नित नये आयाम लिखे, 
जन जन तक पहुंचाऊं , संदेश, 
लौट चलो अब अपने देश, 
नहीं है ख्वाब कुछ पाने का, 
बस यही है मेरा संदेश । 
अभिलेखा अम्बष्ट ,
स्वरचित, रचना 
गाजीपुर

Related Posts

Kavita kaisa dharm tumhara by kamal siwani

July 3, 2021

 कैसा धर्म तुम्हारा ? कहाँ से तूने अपनाए , जीवन का अजब पहाड़ा ? एक दूजे में भेद तू करते,

Kavita kyu aapas me ladna by kamal siwani

July 3, 2021

 क्यूँ आपस में लड़ना ? जाति -धर्म के नाम पर नित दिन, क्योंकर रार मचाते ? हर मानव एक ही

banega apna Desh mahan by Jitendra kabir

July 3, 2021

 बनेगा अपना देश महान कल तक थे जो चोर–बेईमान, वो बन गये हैं रातों–रात ही बड़े शरीफ इंसान, अवसरवादियों को

Yadon ka tarana by kalpana kumari

July 3, 2021

यादों का तराना *** इस कदर सजाया है तेरी यादों को, कि मेरा आशियाना बन चुका है, इन्हीं आशियाने में,

Kaise puja? By kamal siwani bihar

July 3, 2021

 कैसी पूजा ? दया – प्रेम ना उर अंतर में , और पूजा पत्थर की । हे मानव यह कैसी

Parwah kaun karen by kalpana kumari

July 3, 2021

व्यंग्य-कवितापरवाह कौन करे जो स्वत: मिल रहा जीवन में, उसकी परवाह कौन करे। आती सांसे जाती सांसे, सांसो पर जो

Leave a Comment