abhilasha poem by abhilekha ambasth gazipur
अभिलाषा अधरों पे मुस्कान लिए, शहरों में अब गांव मिले, मधुर वाणी की सरगम में, शहरों में अब गांव पले, …
Related Posts
Geet by mainudeen kohari
August 7, 2021
गीत गीत गाए जा.. गुनगुनाए जा… हो सके तो…हो सके तो… मजलूम का दिल बहलाए जा …! गीत गाए जा
Meri kalam kavita mainudeen kohari bikaneri
August 7, 2021
* मेरी कलम * मेरी कलम दिखादे तू अपना कमाल । रोटी मुझे मिले सदा हक़ – ओ – हलाल
Badamashi Kavita by jayshree birmi
August 7, 2021
बदमाशी आई बदमाश बौछरे,भिगोती हुए चौबारे, दौड़ के करो बंद खिड़की, उड़ती चुन्नी खिड़की के पल्ले में अटकी। दौड़ के
Sachcha sathi by Jitendra Kabir
August 7, 2021
सच्चा साथी कामयाबी के समय तो दुनिया साथ आती है, लेकिन संघर्ष के समय जो साथ खड़ा हो पाए उसका
Musaladhar barish kavita by Anita Sharma
August 6, 2021
मूसलाधार बारिश एक जमाना याद आया,मूसलाधार बारिश देखी।यादों के झुरमुट में बसी,वही पुरानी यादें लौटी। लगातार बिन रूके तब,गिरता था
Sandesh prakriti ka kavita by Anita Sharma
August 6, 2021
“संदेश प्रकृति का” संदेश बादल दे रहे समस्त जग को, कल्याण मार्ग हो जीवन आधार। संमार्ग हो ध्येय बादल हमें
