Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Abhi abhi karwan gujrega kavita by vinod kumar rajak

अभी -अभी कारवां गुजरेगा अरे! अभी – अभी चौराहे की सड़कें जाम होगी नहीं पता क्यों? कारवां गुज़रेगा सरकार की …


अभी -अभी कारवां गुजरेगा

अरे! अभी – अभी चौराहे की

सड़कें जाम होगी

नहीं पता

क्यों?

कारवां गुज़रेगा

सरकार की

कड़ी निगरानी के बीच

परिंदों को भी इजाजत नहीं

गुजरे उस सड़कों के ऊपर से

इंसानों की हिमाकत

क्या?

चौराहे पर अचल का वातावरण होगा

जाम की कतारें लम्बी-लम्बी और लम्बी होगी

बीच फसा आम आदमी का

हाल बेहाल होगा

किसी का चेहरा, आंखें लाल तो

किसी का पियर………..

कईयों की सांसे फूलेगी

कईयों की टूटेगी

कईयों का प्रेम छुटेगा

अरे! सरकार की कारवां में

कुछ का मोहभंग टूटेगा

इतना तो होता है, हुआ है और होगा

बड़ा आश्चर्य तब न होगा

कारवां गुज़रते वक़्त

अफ़रा-तफ़री , भगदड़ मचेगी

दंगा होगा और दंगाई अपने रंग में होगा

निर्दोष कुछ लोग मारे जाएंगे

चित्कार,रूदन और मातम बीच

सरकार का कारवां सुरक्षित गुजर जाएंगा

और रह जाएंगा वातावरण में चित्कार का शोर

जो धीमा पड़ शून्य में विलीन हो जाएंगा

फिर शुरू होगा सरकार द्वारा

लासो का सिनाख्त

बहुत सारे लासो की कतारों में

पाया जाएंगा दंगईयो द्वारा रौंदा

पास-पास पड़े दो गुलाब!

(कवि बिनोद कुमार रजक) प्रभारी शिक्षक न्यु डुवार्स हिंदी जुनियर हाईस्कूल , पोस्ट-चामुरची बानरहाट , जिला-जलपाईगुड़ी

, राज्य-पश्चिम बंगाल ७३५२०७

शिक्षा-म ए०,बी ए०,बी एड,यु जी सी नेट


Related Posts

तर्क या कुतर्क- जितेन्द्र ‘कबीर’

March 25, 2022

तर्क या कुतर्क जंग के समर्थन मेंकिसी के तर्कमुझे तब तक स्वीकार नहींजब तक वो खुद सपरिवारउस जंग में कूद

मौत की विजय- जितेन्द्र ‘कबीर’

March 25, 2022

मौत की विजय दुनिया के सभी युद्धों मेंपराजय जीवन कीऔर विजय मौत की होती है,शक्तिशाली होने का भ्रमपाले बैठा है

जनता जाए भाड़ में- जितेन्द्र ‘कबीर’

March 25, 2022

जनता जाए भाड़ में देशभक्ति की आड़ मेंकुछ लोगों ने अपने लिए जुटाईसारी सुख-सुविधाएं,बाकी बची जनता सब वस्तुओं परटैक्स भर-भरकरझोंकती

कितना विरोधाभास है?- जितेन्द्र ‘कबीर’

March 25, 2022

कितना विरोधाभास है? कितना विरोधाभास हैइंसान की फितरत में भी,अपनी हर मुसीबत मेंईश्वर का साथ पाने के लिएप्रार्थना करेगा भी

यह अवश्यंभावी है-जितेन्द्र ‘कबीर’

March 25, 2022

यह अवश्यंभावी है जिस समाज में कलाकारोंका समर्पणकला की उत्कृष्टता के लिए कमऔर उससे होने वालीकमाई व शोहरत पर ज्यादा

प्रचार से परे है सच्चाई- जितेन्द्र ‘कबीर’

March 25, 2022

प्रचार से परे है सच्चाई कानून के राज कीडींग हांकी जा रही है आजकल बहुत,लेकिन इस मामले मेंहत्या, बलात्कार, दबंगई

Leave a Comment