Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Ab ki baar aise ho diwali by Mainudeen Kohri

 अब की बार ऐसी हो दिवाली अबकी बार मनाओ ऐसी दिवाली  । गाँव – शहर में हो जाए खुशहाली । …


 अब की बार ऐसी हो दिवाली

Ab ki baar aise  ho diwali by  Mainudeen Kohri

अबकी बार मनाओ ऐसी दिवाली  ।

गाँव – शहर में हो जाए खुशहाली । ।

प्रदूषण से हो जाए  गलियाँ खाली  ।

सब मिल कर मनाओ ऐसी दिवाली।।

लिछमी जी की पूजा करने  वालों  ।

भुरण् हत्या रोकें ऐसी हो दिवाली ।।

शोषण से मुक्त हो जाएगी हर  नारी ।

रावणवृति हम त्यागें ऐसी हो दिवाली।।

बुराई को रोकें नैतिकता से नातां जोड़ें।

राम – राज्य हम लाएं ऐसी हो दिवाली ।।

जातिवाद-साम्प्रदायिकता की जड़ काटें ।

मानवता का पाठ पढाएं ऐसी हो दिवाली।।

पाखण्डी-लोगों व आतंक का हो अंत करें।

‘नाचीज़”प्रेम-भाव हो ऐसी मनावें दिवाली।।

===========================

   मईनुदीन कोहरी “नाचीज़ बीकानेरी “
           मो.  9680868028
===========================


Related Posts

Aabhasi bediyaan by Jitendra Kabir

September 22, 2021

 आभासी बेड़ियां पिंजरे का पंछी उससे बाहर निकलकर भी उड़ान भरने में हिचकिचाता है बहुत बार, वो दर-असल कैद है

Harj kya hai by Jitendra Kabir

September 22, 2021

 हर्ज क्या है? भाषण से पेट भरने की कला सीख ली है हमनें, रोटी को गाली देनें की  हिमाकत करने

Bura man kar mat baitho by Jitendra Kabir

September 22, 2021

 बुरा मनाकर मत बैठो उस समय भले ही बुरा लगे जब हमारे बुजुर्ग  डांट देते हैं हमें गुस्से में आकर,

Prem pathik by Jitendra Kabir

September 22, 2021

 प्रेम पथिक एक प्रेम बचपन में हुआ था पुस्तकों से, जब भी खोला उन्हें पहुंच गया रहस्य,रोमांच, अहसास और कल्पना

दर्द कहां से पाया हूं ?- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

September 22, 2021

 दर्द कहां से पाया हूं ? तपन जीवन की कहती है ,अपना जो शेष जीवन है ,धरा पर जो सुरक्षित

Desh ka durbhagya by Jitendra Kabir

September 22, 2021

 देश का दुर्भाग्य  कृषि के लिए नीतियां बनाने में कृषक का प्रतिनिधित्व नहीं, शिक्षा के लिए नीतियां बनाने में शिक्षक

Leave a Comment