Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

lekh

Aakhir bahan bhi ma hoti hai by Ashvini kumar

आखिर बहन भी माँ होती है ।  बात तब की है जब पिता जी का अंटिफिसर का आपरेशन हुआ था।बी.एच.यू.के …


आखिर बहन भी माँ होती है । 

Aakhir bahan bhi ma hoti hai by Ashvini kumar

बात तब की है जब पिता जी का अंटिफिसर का आपरेशन हुआ था।बी.एच.यू.के सर सुंदरलाल अस्पताल में आयुर्वेद के सुश्रुत वार्ड में पिता जी भर्ती थे,और मैं उनके साथ था।उस वार्ड में अनेक मरीज थे,परन्तु उन सभी मरीजो में दो ऐसे मरीज थे,जिनसे मेरा कुछ अलग ही लगाव हो गया था।

एक बिहार से थे,वे अकेले-अकेले पड़े रहते थे मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ,फिर मैंने जब उनपे ध्यान दिया तो देखा कि कोई लड़का आता देखकर चला जाता।कई दिन हुए जब मुझसे नहीं रह गया तो मैंने उनसे पूछा-चाचा आप कहा से आये है और यह कौन है जो आपको देखने आते है और फिर देखकर चले जाते है।मत पूछिए-मैं यहाँ पर एक महीने से पड़ा हूँ।वो मेरे लड़के है,मुझे देखकर वे घर चले जाते है बीच-बीच में।क्योंकि घर पर मेरी पत्नी यानी उनकी मां का भी स्वाथ्य ठीक नही रहता।बस यही तीन का परिवार हैं।मैं ट्रक चलाता था,कमाता था बस इसी से परिवार का गुजर बसर होता था,मैं एक साल से परेशान हु,बैठा हूँ।बेटा भी कमाता था पर मेरी वजह से वह भी बैठा हैं,खेती बाड़ी भी नही है।रोज मेहनत करना ही आर्थिक सहारा था,कमाना खाना था।पर अब कैसे क्या करे,क्या होगा कुछ पता नही। 

मैं यह सब सुन कर बहुत परेशान रहा।मैं उसी वक्त भगवान से प्रार्थना की भगवान किसी गरीब मत बनाना और यदि बना भी दिया तो किसी को किसी तरह का बीमारी मत देना रोगी मत बनाना।।

और जो दूसरे थे वह कौशाम्बी से थे।वे काफी नौजवान तथा कम उम्र के जान पड़ते थे।उनकी सेवा शुश्रुषा एक दीदी यानी उनकी बड़ी बहन करती थी।जब मैं उनकी कहानी जाना तो हतप्रभ रह गया।कुछ देर के लिए तो यकीन नही हो रहा था,फिर भी सोचा कलयुग है साहब कुछ भी हो सकता है।और जब मैं पूछा भैया आप अकेले है और यह दीदी भी अकेली परेशान है और कोई घर का नही है क्या?जैसे भाई,पिता आदि आदि।तो उन्होंने कहा नही,मेरा इस दुनिया मे इस बहन के अलावा कोई नही।सभी लोग मेरे लिए मर चुके है।मैंने बोला ऐसा क्यों कह रहे है?सभी मेरे पैसे से प्यार करते है।मैं डायमंड कम्पनी में काम करता था,कम उम्र से ही और पैसा भी अच्छा खासा कमाता था परंतु बीमारी ने मुझे असहाय और लाचार बना दिया।मैंने घर द्वार भी बनवाये।घर की सभी जरूरते भी पूरा की सबकी सेवा भी की पर अफसोस कि मुझे कोई देखने तक नही आया।मैं यह साल भर छः महीने से हू,कोई यहाँ तक भी पता नही लगाया कि मैं जिंदा भी हूँ या मर गया हूं।और फ़ोन की तो बात ही दूर है।पूरा गांव आया देखने पर वह माँ भी नही आयी,जिसने मुझे नौ महीने अपने कोख में पाला था,आँचल में छिपाया था।क्योंकि मेरे बीमारी में पैसे लग रहा था।

जब से मैं यहाँ आया हूँ यह बहन भी तभी से अपना सब कुछ छोड़ छाड़ के मेरे साथ है।मेरी देखभाल कर रही हैं।

अब तो यह बहन ही मेरे लिए सब कुछ हैं-पिता है,भाई है,माँ भी है,यहाँ तक की मेरे लिए भगवान भी  वही हैं।

और यह सब सुन कर  मेरी आँखें  नम तो हुई पर उस बहन के आँखो से अश्रुधारा बहने लगी।

रिस्तों_के_संसार_में_कभी_ऐसा_न_हो।

पैसा_ही_सब_कुछ_हो_रिस्ता_कुछ_भी_न_हो।।

                        अश्विनीकुमार


Related Posts

खेलों के पीछे शर्मनाक खेल

January 24, 2023

खेलों के पीछे शर्मनाक खेल देश के जो खिलाड़ी विदेशी सरजमीं पर तिरंगे का मान बढ़ाते आए हैं. उन्हें अपने

खुद के साथ समय निकालना सीखें

January 23, 2023

आओ खुद के साथ समय निकालना सीखें मानसिक स्वास्थ्य, शारीरिक ऊर्जा और तनाव मुक्त जीवन के लिए खुद के साथ

बच्चों में बढ़ती ऑनलाइन शापिंग की आदत, कैसे कंट्रोल करें

January 23, 2023

बच्चों की ऑनलाइन शापिंग की आदत बड़ों का बजट बिगाड़ देती है। अगर मां-बाप बच्चों की छोटी उम्र से ही बचत

जिलियन हसलम : एक ब्रिटिश इंडियन महिला जो भारत को नहीं भूल सकती | jillian haslam

January 23, 2023

जिलियन हसलम : एक ब्रिटिश इंडियन महिला जो भारत को नहीं भूल सकती भारत की आजादी के बाद ज्यादातर अंग्रेज

सुपरहिट कन्हैयालाल: कर भला तो हो भला | Superhit Kanhaiyalal

January 19, 2023

सुपरहिट कन्हैयालाल: कर अच्छा तो हो अच्छा ओटीटी प्लेटफॉर्म एम एक्स प्लेयर पर ‘नाम था कन्हैयालाल’ नाम की एक डाक्यूमेंट्री

आपदा जोखिम की जड़ें कहीं? अंकुर कहीं।Where are the roots of disaster risk? Sprout somewhere.

January 19, 2023

आपदा जोखिम की जड़ें कहीं? अंकुर कहीं। अनियंत्रित शहरीकरण, भूकंपीय क्षेत्रों में निर्माण, तेजी से कटाव की गतिविधि ने इस

PreviousNext

Leave a Comment