Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Aajkal ke siyashtdan by Jitendra Kabir

 आजकल के सियासतदां मारना जो हो कभी ‘श्वान’ तो दे कर उसे पागल करार खूब कर दो बदनाम ताकि जब …


 आजकल के सियासतदां

Aajkal ke siyashtdan by Jitendra Kabir

मारना जो हो कभी ‘श्वान’

तो दे कर उसे

पागल करार

खूब कर दो बदनाम

ताकि जब मारो उसे

तो करे ना दुनिया 

कोई सवाल,

प्रयोग खूब करते हैं

इस युक्ति का इंसानों पर

आजकल के सियासतदां।

किसी भी घटना को

सांप्रदायिक रंग देने के लिए

तैयार बैठे रहते हैं

सोशल मीडिया के उनके पहलवान,

दलगत व निजी स्वार्थ के आगे

ऐसे लोग नहीं देते

किसी की इज्जत और 

प्राणों को भी अधिमान,

राजनीति में सही-गलत

कोई भी हथकंडा अपनाकर

सफल होने वालों का दौर चला है,

इंसान नहीं हों जैसे

कोई शिकारी जानवर ही बन गये हैं

आजकल के सियासतदां।

                          जितेन्द्र ‘कबीर’


Related Posts

मदर्स डे विशेष -माँ की दुआएं

May 6, 2022

मदर्स डे विशेष माँ की दुआएं घर से सफर करने निकलना हो । माँ को जहन में रख निकला करो

कविता-मां ही जन्नत

May 6, 2022

कविता-मां ही जन्नत न मैं मंदिर पुजू न मस्जिद और न ही गुरूद्वारा,मां के चरणों में ही समाई है देखो

कविता-समाज में और जागरूकता लाए !

May 6, 2022

समाज में और जागरूकता लाए ! समाज में जागरूकता लाए,सभी को शिक्षित बनाए,बेटियों को बराबरी का दर्जा दिलाए, समाज में

कविता – कोयले की किल्लत

May 6, 2022

कविता -कोयले की किल्लत कोयले नें राजनीतिक माहौल में गर्मी लाई कमीं दूर अपनी आइडिया समस्याएं बतलाईअंतरराष्ट्रीय बाजार की बात

मुस्कान के मरहम से नासूरों को सजाती हूँ”

May 4, 2022

मुस्कान के मरहम से नासूरों को सजाती हूँ सुकून को संभालना आसान नहीं बड़े नाज़ों से पालती हूँ, ज़ख़्मों के

कविता-आपनो राजस्थान!

May 2, 2022

 आपनो राजस्थान! रेतीली मरुस्थलीय भूमि,ऊंट पर बैठकर सवारी, जीवंत संस्कृति,जब ये यादे मानस पटल पर आती,रखता है विशिष्ट पहचानम्हारों रंगीलों

PreviousNext

Leave a Comment