Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Aalekh, lekh

Aaj ke dhritrastra by Jayshree birmi

 आज के धृतराष्ट्र  हमारे देश ने बहुत ही उन्नति की हैं,दिन ब दिन दुनियां की रेटिंग मेगाजिंस में हमारे करोड़पतियों …


 आज के धृतराष्ट्र

Aaj ke dhritrastra by Jayshree birmi

 हमारे देश ने बहुत ही उन्नति की हैं,दिन ब दिन दुनियां की रेटिंग मेगाजिंस में हमारे करोड़पतियों के नाम जुड़ते जा रहें है ,

 जिनमे औद्योगपतियों के साथ साथ फिल्मी दुनियां वालों के भी नाम हैं।हजारों करोड़ की संपत्ति के मालिक होके अपनी जीवन शैली ऐसी बना लेते हैं कि अपने ही परिवार के सभ्यों से मिलने के लिए अपॉन्टमेंट लेनी पड़ जाए।कभी कभी तो उनको आपस में मिले को हफ्तों या महीनों लग जाते हैं।इसकी वजह काम की व्यस्तता ही नहीं ,पार्टियों में और दोस्तों में व्यस्त रहना भी हैं।बच्चे कहां जा रहे हैं,उनके मित्र कौन कौन हैं और कैसे हैं ये सब जानने की न ही उनके अभिभावकों को आवश्यकता हैं और न ही समय हैं।ऐसे में जो बच्चे जिन्हे सिर्फ दाई या केयरटेकर्स ने पाला हो उनकी सोच कैसी और कहा तक की होगी।कितने ऐसे करोड़पतियों के बच्चे हैं जो जिंदगी में कुछ बन पाये हैं , वे तो कुछ ही प्रतिशत होंगे जिन्हों ने कुछ कर दिखाया हो।जैसे माधवन का बेटा तैराकी में अव्वल आया हैं।ये सिर्फ और सिर्फ उनके लालन पालन का ही नतीजा हैं।इन कुछ सालों में तो कितने ही मामले  सामने आए हैं नशीले पदार्थो के सेवन करने वालों के चाहे वह हीरो हो या हीरों के बच्चें।हीरों को तो चलो मेहनत का फल मिला और वे अमीर बन गए लेकिन उनके बच्चें,सिर्फ पैसे जाया करने के लिए ही जिंदा रहते हैं।उनके लिए जिंदगी का मतलब ही मौज और ऐश करना होता हैं।कौन पूछने वाला हैं कि इतने पैसे कहां व्यय हुए और जहां व्यय किया हैं वह वजह वाजिब हैं या नहीं।ऐसे अभिभावकों का काम ही समय नहीं दे पाने की एवज में उन्हें पैसे दे अपनी जिम्मेवारी से मुक्त होना ही होता हैं।

अभी आर्यन को जमानत मिली तो क्या तामजाम और पटाखे, बैंडबाजे, शहनाईयां बजी और हजारों की भीड़ इक्कठी हुई।क्या आर्यन कोई जंग जीत के आया था,कोई बहुत बड़ी डिग्री ले के आया था? क्या वजह थी इन सब तमाशों की,क्या खिसयायी बिल्ली खंभा नौच रही थी।जिसके पास पैसे हैं वह सब कुछ खरीद सकता हैं, कहते हैं वहा जितने भी  उसके कथित चाहक थे, तकरीबन उतने ही मीडिया वाले भी थे ,कैमरामैन  भी थे।पहले के जमाने में जब कोई महारथी जंग जीत के आते थे तब ऐसे स्वागत होते थे।एक २३ साल का जवान लड़का तो मर्द कहलाता हैं मुंह में चुपनी लिए छोटा बच्चा नहीं।हमारी  सैना में,पुलिस महकमें में,और कितने ही दूसरे महकमों में इस उम्र के लड़के अपनी आजीविका कमा ने के लिए कार्य करते हैं।सैन्य में तो इस उम्र के लड़के शहीद तक हो चुके हैं क्या उनकी शहादत को ऐसे नवाजा जाता हैं,कितने

 मीडिया वाले वहां साक्षात्कार करने जाते हैं? क्यों इतने नाक चढ़े फिल्मीदूनियां वालों को सर पर चढ़ायां जा रहा हैं कुछ देश वासियों द्वारा?

ये सब धृतराष्ट्र हैं , अंध धृतराष्ट्र जो खुद नहीं कर पाया कुछ , पांडु के राज्य को उनकी एवज में चला कर एक असामर्थ्य की प्रतिमा बन विदूर जी और भीष्मपितामह की छत्र छाया में राज किया उसे अपने   अभिमानी बेटे को समर्थ बनाने के लिए खुल्ली छूट दे रखी थी और वह भी मामा शकुनि शह में आ कर छलकपट के खेल खेलता रहा और उन्ही छल कपट की वजह से महाभारत का युद्ध हुआ,जो नरसंहार का अप्रतिम उदाहरण था, यहां तक कि आजतक कोई भी घर में महाभारत की  न तो कथा होती हैं और न ही ग्रंथ को ही रखा जाता हैं ।घरों में रामायण और गीता जरूर रखी और पाठ भी होता हैं किंतु महाभारत का नहीं।

    आज के ये धृतराष्ट्र भी सामाजिक मूल्यों का अवमूलन कर एक अदृश्य महाभारत को लिख रहे हैं, जिसका परिणाम अदृश्य नहीं होगा,वह सामाजिक और नैतिक पतन के रास्ते पर समाज को ले जायेगा।

अब सभी धृतराष्ट्र जैसे अभिभावकों के लिए जागने का समय आ गया हैं और सभी गंधारियों का अपनी आंखों पर से पट्टी खोलने का भी।

जयश्री बिरमी
अहमदाबाद


Related Posts

विश्व हृदय दिवस 2022

September 28, 2022

 29 सितंबर विश्व हृदय दिवस 2022 युवाओं में दिल का दौरा, भारत के हृदय पर बोझ  प्रत्येक व्यक्ति को हर

अंतिम संस्कार या अंत्येष्टि क्रिया हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में से आखरी संस्कार

September 28, 2022

जातसंस्कारैणेमं लोकमभिजयति मृतसंस्कारैणामुं लोकम्। अंत्येष्टि – सुपुर्द-ए-ख़ाक अंतिम संस्कार या अंत्येष्टि क्रिया हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में से आखरी

“घर एक मंदिर”

September 28, 2022

“घर एक मंदिर” घर एक महफ़ूज़ आशियाना होता है इंसान को सर छुपाने का। ज़िंदगी की जद्दोजहद से जूझते थका-हारा

अतिथि देवो भव

September 27, 2022

अतिथि देवो भव हर देश के लिए पर्यटन एक सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक समृद्धि की कुंजी है राष्ट्रीय डिजिटल पर्यटन

डॉलर बनाम रुपया

September 27, 2022

डॉलर बनाम रुपया ,डॉलर की मार रुपया लाचार डॉलर के आगे नतमस्तक होते रुपए से, पहले से मौजूद महंगाई डायन

मेरी बिटिया (Poem)

September 27, 2022

मेरी बिटिया मुस्कुराहट तेरी मुझे है भाती तेरी मुस्कुराहट पर वारी जातीएक मुस्कान के लिए तेरी मैंभिन्न-भिन्न तरीके से रास

Leave a Comment