Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

21 वीं सदी की नारी-डॉ. माध्वी बोरसे!

21 वीं सदी की नारी! उठाओ कलम, पुस्तक व लैपटॉपकरो परीक्षा की तैयारी,कुछ तुम उठाओ,कुछ परिवार में बाटोअपने घर की …


21 वीं सदी की नारी!

21 वीं सदी की नारी-डॉ. माध्वी बोरसे!

उठाओ कलम, पुस्तक व लैपटॉप
करो परीक्षा की तैयारी,
कुछ तुम उठाओ,कुछ परिवार में बाटो
अपने घर की जिम्मेदारी,
लिखने ,पढ़ने व काम करने की अब है
तुम्हारी भी बारी ,
भूलो ना, याद रखो
तुम हो 21वी सदीं की नारी !
हां हां भूलो ना और याद रखो तुम हो 21वीं सदी की नारी!

सीखो करना आत्म रक्षा,ना पैदा हो
अब कोई अत्याचारी,
खुल के जियो
पहनो जींस,टॉप , स्कर्ट हो या साड़ी
बनो बलशाली, ताकतवर, बहोत अब
तक कहलाई तुम प्यारी,
भूलो ना और याद रखो तुम हो 21वीं सदी की नारी!
जी हां भूलो ना और याद रखो तुम हो 21वीं सदी की नारी!

भले ही हो तो मां, बेटी, बहन, पर सबसे पहले तुम हो एक नारी,
तुम्हारा भी है खुद का वजूद, तोड़ो रूढ़ीवादी परंपराएं सारी,
रहो प्रसन्न चित्त, दिखा दो इस दुनिया को अपनी कलाकारी,
भूलो ना और याद रखो तुम हो 21वीं सदी की नारी!
हां जी हां भूलो ना और याद रखो तुम हो 21वीं सदी की नारी!

ना चुप बैठो ना शर्माओ, सुनाओ तुम करारी,
गलत के खिलाफ उठाओ आवाज 

और तुम कर दो मुकदमा जारी ,

अब जीतो व जीताओ
अब तक बहुत जगह हारी,
भूलो ना और याद रखो तुम हो 21वीं सदी की नारी!
सुनो, भूलो ना और याद रखो तुम हो 21वीं सदी की नारी!

कभी आग, तो कभी पानी, कभी बन जाओ चिंगारी,
खुश हो जाओ, चाहे आए बेटे या बेटी की किलकारी,
औरत ना कभी थी और ना कभी कहलाएगी बेचारी,
भूलो ना और याद रखो तुम हो 21वीं सदी की नारी!
जान लो भूलो ना और याद रखो तुम हो 21वीं सदी की नारी!

चलाओ बाइक,एयरोप्लेन,ऑटो हो या फरारी,
कोई धमकाएं व डराए तो पड़ जाओ उनपर भारी,
हो जाओ शिक्षित, निखारो अब भविष्य लेते जाओ
जानकारी,
भूलो ना याद रखो
तुम हो 21सदीं की नारी !
मान लो भूलो ना और याद रखो तुम हो 21वीं सदी की नारी!

कोई दखलंदाजी करें, तो बन जाओ चाकू छुरी और आरी,
हर फैसले तुम्हारे हो, यह जिंदगी है तुम्हारी,
शांति का प्रतीक, तो कभी तुम बन जाओ क्रांतिकारी,
भूलो ना और याद रखो तुम हो 21वीं सदी की नारी!
पहचान लो, भूलो ना और याद रखो तुम हो 21वीं सदी की नारी!

तुम्हें भी हक है, बनाओ दोस्ती यारी,
कभी मॉडर्न, तो कभी बन जाओ संस्कारी,
कभी घरेलू, कभी व्यवसाय, कभी बनो तुम व्यापारी,
भूलो ना याद रखो
तुम हो 21सदीं की नारी !
समझ लो और भूलो ना और याद रखो तुम हो 21वीं सदी की नारी!
कभी पार्वती,कभी दुर्गा तो कभी बन जाओ काली,
बनो स्वाभिमानी,करो जो ठानी,ना होना पड़े आभारी
हर क्षेत्र में,हर व्यवसाय में हो तुम्हारी तरफदारी ,
भूलो ना तुम याद रखो तुम हो 21 वीं सदी की नारी !
आप भी ,भूलो ना और याद रखो तुम हो 21वीं सदी की नारी!

विवाहित हो या हो विधवा, या हो तुम कुंवारी,
दिखा दो इस दुनिया को, क्या होती है वफादारी,
जाने तुम्हें जहान, तुम में भी मैं भी हो खुद्दारी,
भूलो ना याद रखो
तुम हो 21सदीं की नारी !
हां जी, भूलो ना और याद रखो तुम हो 21वीं सदी की नारी!

मिलके लाओ एक बदलाव, देख के दफा हो भ्रष्टाचारी
दिखाओ क्या होती है, मेहनत व सिद्दत से काम करके ईमानदारी,
गर्व से ऊंचा हो सर व हिम्मत हो बहुत सारी,
भूलो ना याद रखो तुम हो 21 वीं सदी की नारी
देखो, भूलो ना याद रखो तुम हो 21वीं सदी की नारी !

उठाओ कलम, पुस्तक व लैपटॉप
करो परीक्षा की तैयारी,
कुछ तुम उठाओ,कुछ परिवार में बाटो
अपने घर की जिम्मेदारी,
लिखने ,पढ़ने व काम करने की अब है
तुम्हारी भी बारी , भूलो ना याद रखो
तुम हो 21सदीं की नारी !
हां हां भूलो ना और याद रखो तुम हो 21वीं सदी की नारी!

डॉ. माध्वी बोरसे!
(स्वरचित व मौलिक रचना)
राजस्थान (रावतभाटा)!


Related Posts

मदर्स डे विशेष -माँ की दुआएं

May 6, 2022

मदर्स डे विशेष माँ की दुआएं घर से सफर करने निकलना हो । माँ को जहन में रख निकला करो

कविता-मां ही जन्नत

May 6, 2022

कविता-मां ही जन्नत न मैं मंदिर पुजू न मस्जिद और न ही गुरूद्वारा,मां के चरणों में ही समाई है देखो

कविता-समाज में और जागरूकता लाए !

May 6, 2022

समाज में और जागरूकता लाए ! समाज में जागरूकता लाए,सभी को शिक्षित बनाए,बेटियों को बराबरी का दर्जा दिलाए, समाज में

कविता – कोयले की किल्लत

May 6, 2022

कविता -कोयले की किल्लत कोयले नें राजनीतिक माहौल में गर्मी लाई कमीं दूर अपनी आइडिया समस्याएं बतलाईअंतरराष्ट्रीय बाजार की बात

मुस्कान के मरहम से नासूरों को सजाती हूँ”

May 4, 2022

मुस्कान के मरहम से नासूरों को सजाती हूँ सुकून को संभालना आसान नहीं बड़े नाज़ों से पालती हूँ, ज़ख़्मों के

कविता-आपनो राजस्थान!

May 2, 2022

 आपनो राजस्थान! रेतीली मरुस्थलीय भूमि,ऊंट पर बैठकर सवारी, जीवंत संस्कृति,जब ये यादे मानस पटल पर आती,रखता है विशिष्ट पहचानम्हारों रंगीलों

PreviousNext

Leave a Comment