Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, poem

हौंसले-जयश्री बिरमी

हौंसले एक सुंदर नारीचल पड़ी गगन विहारीथा उसे उडना बहुतदूर दूर क्षितिज से भी दूरपंख थे छोटे और कोमलपार करेगी …


हौंसले

हौंसले-जयश्री बिरमी

एक सुंदर नारी
चल पड़ी गगन विहारी
था उसे उडना बहुत
दूर दूर क्षितिज से भी दूर
पंख थे छोटे और कोमल
पार करेगी कैसे वह अंबर
फिर भी निकल पड़ी वह
ले ली बहुत ऊंची उड़ान
अब चढी थी परवान
जब चढ़ी परवान तो हुई ज्यादा ही दृश्यमान
देख उसे सब गिद्ध बोले
ये कौन हैं जो आसमान पर डोले
आए देखने गिद्ध भयानक
दिख गई वो कन्या अचानक
देख गिद्धों को वह भागी उड़ान छोड़
लेकिन एक ही पंजा आया और ले उड़ा दूर
गभराई वह तिलमिलाई भी
लेकिन बच नहीं पाई आक्रमण से
ले उड़ा वह दूर उसे
उसकी उड़ान के हौसलों से भी ऊपर
बिखर गई वह टूट कर रह गई वह
पंख कतरे गए तो उड़े
कोई भी ऐसे कोई कैसे
दो विकल्पों के बीच झुलती थी वह
तय करना था अपना भावी
हौंसला छोड़ कर बैठ जाती
या अपनी उड़ान को परवान चढ़ाती
किंतु रखा उसने हौसला बहुत
फिर भरी उड़ान वहीं कहीं दूर दूर तक क्षितिज से भी पर
पड गया नभ छोटा उसको
भरी ऐसी उड़ान
गिरने के भय था
भय से क्यों हौंसला छोड़े
साहस का हर तिनका जोड़े
बढ़ चली वह दूर दूर तक
अपने ध्येय के पथ पर
नारी थी पर कमजोर नहीं थी
टूट ने वाली डोर नहीं थी

जयश्री बिरमी
अहमदाबाद
गुजरात


Related Posts

प्रकाश पर्व दीपावली की बधाईयां/Deepawali par kavita

October 22, 2022

 कविता -प्रकाश पर्व दीपावली की बधाईयां प्रकाश पर्व दीपावली की बधाई  पारंपरिक हर्ष और उत्साह लेकर आई  राष्ट्रपति प्रधानमंत्री ने

इस धरा पर…. ” (कविता…)

October 19, 2022

नन्हीं कड़ी में…. आज की बात “इस धरा पर…. ” (कविता…) सूरज की पहली किरण से,जैसे जगमग होता ये संसार।दीपों

ये ना समझो पाठकों

October 19, 2022

अरे ! लोग कहते जख़्मी दिल जिसकावही तो दर्द-ए शायर/शायरा होता है।।ज़ख़्मी दिल रोए उसका ज़ार-ज़ार जबतब कलम का हर

अपने लिए जिएं तो क्या जिएं

October 19, 2022

जीवन की राहें कभी कठिन कभी सरल हुआ करती हैं।सरल राहों पर तो हंसते हुए गुजर जातें हैं हम लेकिन

धनतेरस के दिन मैंने अपनी मां को खोया

October 19, 2022

धनतेरस 2020 के दिन मैं अपनी मां के साथ बैठा था अचानक उसे साइलेंट अटैक आया और मेरी नजरों के

पता नहीं क्यों

October 17, 2022

कविता –पता नहीं क्यों मुझे घर का कोइ एक सख्श याद नहीं आता। मुझे याद आता है वो भाव, वो

PreviousNext

Leave a Comment