Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, poem

है वादा। Kavita -hai waada

है वादा।  पढ़ो पर लिखो ज्यादा,बोलो पर सोचो ज्यादा,खेलो पर पढ़ो ज्यादा,आप सफल होंगे है वादा। खाओ पर चबाओ ज्यादा,रोइए …


है वादा। 

पढ़ो पर लिखो ज्यादा,
बोलो पर सोचो ज्यादा,
खेलो पर पढ़ो ज्यादा,
आप सफल होंगे है वादा।

खाओ पर चबाओ ज्यादा,
रोइए कम हसिये ज्यादा,
सोओ पर जगो ज्यादा,
आप स्वस्थ रहोगे है वादा।

मांगो कम से कम दो ज्यादा,
रूठो कम मनाओ ज्यादा,
आराम करो पर मेहनत ज्यादा,
स्वाभिमान बना रहेगा है वादा।

नफरत ना के बराबर पर प्रेम ज्यादा,
आज्ञा दो पर मानो ज्यादा,
गुस्सा कम पर समझो ज्यादा,
जीवन सुकून से गुजरेगा है वादा।

About author

डॉ. माधवी बोरसे अंतरराष्ट्रीय वक्ता

डॉ. माधवी बोरसे
अंतरराष्ट्रीय वक्ता
स्वरचित मौलिक रचना
राजस्थान (रावतभाटा)


Related Posts

चुनाव के पहले और बाद में

June 24, 2022

 चुनाव के पहले और बाद में जितेन्द्र ‘कबीर’ जनता के सामने विनम्र याचक मुद्रा में नेता लोकतंत्र के पर्व की 

विज्ञापन-मय भारत

June 24, 2022

 विज्ञापन-मय भारत जितेन्द्र ‘कबीर’ सरकारी अस्पतालों में पर्ची बनाने से लेकर डॉक्टर को दिखाने एवं छत्तीस प्रकार के टेस्ट करवाने

सभ्यता का कलंक

June 24, 2022

 सभ्यता का कलंक जितेन्द्र ‘कबीर’ बंदरों के झुंड का सरदार अपनी शारीरिक शक्ति के बल पर संसर्ग करता है अपने

नफरत की आग

June 24, 2022

 नफरत की आग जितेन्द्र ‘कबीर’ आग! आग से बुझती नहीं कभी, बुझती है रेत या फिर पानी से, नफरत की

ईश्वर क्या है?

June 24, 2022

 ईश्वर क्या है? जितेन्द्र ‘कबीर’ एक उम्मीद है! कुछ अच्छा होने की, अपने जीवन में कठिनाइयों से जूझते इंसान के

ऐसे बदलाव नहीं आएंगे

June 24, 2022

 ऐसे बदलाव नहीं आएंगे जितेन्द्र ‘कबीर’ सिर्फ इसलिए कि हमें बुरा लगता है देखना… देश को दंगे-फसादों में जलते हुए,

PreviousNext

Leave a Comment