भावनानी के भाव
हे परवरदिगार मेरे मालिक
भावनानी के भाव हे परवरदिगार मेरे मालिक मैंने कहा गुनहगार हूं मैं उसने कहा बक्ष दूंगा मैंने कहा परेशान हूं …
मैंने कहा गुनहगार हूं मैं
उसने कहा बक्ष दूंगा
मैंने कहा परेशान हूं मैं
उसने कहा संभाल लूंगा
मैंने कहा अकेला हूं मैं
उसने कहा साथ हूं मैं
मैंने कहा उदास हूं मैं
उसने कहा हर वक्त तेरे पास हूं
मैंने कहा हरदम सुखी रहूं मैं
उसने कहा अच्छे कर्म कर साथ हूं मैं
मैंने कहा धन दौलत का धनी बनूं मैं
उसने कहा मेहनत कर विकार छोड़ तेरे साथ हूं मैं
मैनें कहा निरोगी काया मन मस्त रहूं मैं
उसने कहा भ्रष्टाचार कालीकमाई छोड़ साथ हूं मैं
मैंने कहा तेरे चरणों की सेवा करता रहूं मैं
उसनेकहा मातापिताआचार्य देवोभव:फिर तेरे साथ हूं मैं
मैंने कहा सबकुछ तेरा कुछना मेरा मेरे माधव जी
उसने कहा नेक काम में लगा तेरे साथ हूं मैं
मैंने कहा तेरे दर्शन दीदार कर तेरे चरणों में रहूं मैं
उसने कहा मन में झांक उसमे बैठा हूं मैं
Related Posts
kavita – Gyani abhimani mosam khan alwar
May 30, 2021
अज्ञानी अभिमानी सबसे अच्छा है तू इंसान , सबसे ज्यादा है तेरा सम्मान,, पल भर की ये तेरी
Kavita – Maa -pawan kumar yadav
May 29, 2021
कविता – मॉं धन्य है ! मॉं धन्य मॉं की ममता । नौ मास मुझको, रखा गर्भ के भीतर ।
Tum thi khusahal the hm
May 9, 2021
ग़ज़ल बहुत खुशी कुछ गम भी हैतेरे यादों में डूबे हम भी है तुम थी खुशहाल थे हम तेरे जाने
Tum ho meri mohabat rahogi meri
March 5, 2021
Tum ho meri mohabat rahogi meri बारिशों के बूँद सा टपकता रहातुम भी रोती रही मैं भी रोता रहाप्यार तुझको
