Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, poem

हे परवरदिगार मेरे मालिक

 भावनानी के भाव हे परवरदिगार मेरे मालिक मैंने कहा गुनहगार हूं मैं  उसने कहा बक्ष दूंगा  मैंने कहा परेशान हूं …


 भावनानी के भाव

हे परवरदिगार मेरे मालिक

मैंने कहा गुनहगार हूं मैं 
उसने कहा बक्ष दूंगा 
मैंने कहा परेशान हूं मैं 
उसने कहा संभाल लूंगा 
मैंने कहा अकेला हूं मैं 
उसने कहा साथ हूं मैं 
मैंने कहा उदास हूं मैं 
उसने कहा हर वक्त तेरे पास हूं 
मैंने कहा हरदम सुखी रहूं मैं 
उसने कहा अच्छे कर्म कर साथ हूं मैं 
मैंने कहा धन दौलत का धनी बनूं मैं 
उसने कहा मेहनत कर विकार छोड़ तेरे साथ हूं मैं 
मैनें कहा निरोगी काया मन मस्त रहूं मैं 
उसने कहा भ्रष्टाचार कालीकमाई छोड़ साथ हूं मैं 
मैंने कहा तेरे चरणों की सेवा करता रहूं मैं 
उसनेकहा मातापिताआचार्य देवोभव:फिर तेरे साथ हूं मैं 
मैंने कहा सबकुछ तेरा कुछना मेरा मेरे माधव जी 
उसने कहा नेक काम में लगा तेरे साथ हूं मैं 
मैंने कहा तेरे दर्शन दीदार कर तेरे चरणों में रहूं मैं 
उसने कहा मन में झांक उसमे बैठा हूं मैं 

About author

कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र 


Related Posts

नी बखत री बात-मईनुदीन कोहरी”नाचीज़ “

February 3, 2022

नी बखत री बात धोरां री आ ” धरती , धीरज री धरा सांतरी । सोनै सी गोरी बाळू रेत

तू ही तू है- नाचीज़ बीकानेरी “

February 3, 2022

तू ही -तू है जमीं से फलक तक तू ही -तू है । दिल की धड़कनों में तू ही –

सूरज दादा- विजय लक्ष्मी पाण्डेय

February 3, 2022

सूरज दादा सूरज दादा उठा के गठरी, चले कुम्भ के मेला में।बसन्त पंचमी नहा केआउँ,दिन बीता बहुत झमेला में।।लुका छिपी

ऊँचा हो गया कद लोगों का जमींन से-विजय लक्ष्मी पाण्डेय

February 3, 2022

ऊँचा हो गया कद लोगों का जमींन से ऊँचा हो गया कद लोगों का जमीन सेसुना है जमीनें बंजर पड़ी

मेरे यार फेसबुकिए-सिद्धार्थ गोरखपुरी

February 3, 2022

मेरे यार फेसबुकिए मेरे यार फेसबुकिए बता दो इस समय तुम हो कहाँमैंने तुम्हें ढूंढ रहा हूँयहाँ -वहाँ न जाने

रात है तो सुबह भी तो आयेगी- अनिता शर्मा झाँसी

January 25, 2022

रात है तो सुबह भी तो आयेगी मन रे तू मत हो निराशकल एक नयी सुबह आयेगी।बीतेगी दुखो की घड़ियाँछायेगा

Leave a Comment