Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

हृदय के चाँद

 हृदय के चाँद                                   …


 हृदय के चाँद

     

Hriday ke Chand by Dr. indu kumari

                             

मेरे चाँद उर (हृदय)में रहते है

वही तो मेरा सहारा है।

वो नहीं तो कुछ भी नहीं

ना जीने का इरादा है।

सजती हूँ संवरती हूँ

क्रीड़ा कौतुक करती हूँ

उसके बिना कुछ भी नही

जीवन अधुरा लगता है

जनम-जनम का साथी है

जीवन की पतवार है वो

वही तो जीवन के खेबैया

वही तो मेरा प्यार है

 मेरा चाँद थोड़ा अकड़ू है

 पर दिल के सच्चे अच्छे है

व्रती बनी हूँ जीवन भर की

पलकों पे बिठाकर रखी हूँ।

मेरे चाँद उर में रहते हैं

वही तो मेरा सहारा है।

डॉ.इन्दु कुमारी
मधेपुरा बिहार

                  


Related Posts

कविता – न मिला

September 1, 2022

कविता – न मिला एक उम्र खरच कर कुछ न मिलातुमको क्या पता सचमुच न मिलाक्या हुआ है कोई धरती

कविता – बे-परवाह जमाना

September 1, 2022

कविता – बे-परवाह जमाना ये मन अक्सर बुनता रहता है ,ख्वाबों का ताना बाना ।दिल भी अक्सर छेड़े रहता है

कविता – नयन

September 1, 2022

कविता – नयन दोनों नयन सावन बनकररिमझिम – रिमझिम बरसात करेंसमझ तनिक आता ही नहींके कितने हैं जज़्बात भरे मौन

कविता -शहर चलाता है

September 1, 2022

रिक्शा, ऑटोरिक्शा, इलेट्रिक रिक्शा चलाने वाले भाईयों को समर्पित रचना कविता -शहर चलाता है जो बिना थके सारा शहर चलाता

कविता – शिव और सावन

September 1, 2022

कविता – शिव और सावन सावन शिव हुए अवतरित धरती परसावन में निज ससुराल गएहुआ अर्घ्य और जलाभिषेक से स्वागत

सावन की बौछार

September 1, 2022

 सावन की बौछार सावन की बौछार यारतन – मन को भिगाती हैमस्त फुहारें इस सावन कीयाद किसी की दिलाती है

PreviousNext

Leave a Comment