Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

हृदय के चाँद

 हृदय के चाँद                                   …


 हृदय के चाँद

     

Hriday ke Chand by Dr. indu kumari

                             

मेरे चाँद उर (हृदय)में रहते है

वही तो मेरा सहारा है।

वो नहीं तो कुछ भी नहीं

ना जीने का इरादा है।

सजती हूँ संवरती हूँ

क्रीड़ा कौतुक करती हूँ

उसके बिना कुछ भी नही

जीवन अधुरा लगता है

जनम-जनम का साथी है

जीवन की पतवार है वो

वही तो जीवन के खेबैया

वही तो मेरा प्यार है

 मेरा चाँद थोड़ा अकड़ू है

 पर दिल के सच्चे अच्छे है

व्रती बनी हूँ जीवन भर की

पलकों पे बिठाकर रखी हूँ।

मेरे चाँद उर में रहते हैं

वही तो मेरा सहारा है।

डॉ.इन्दु कुमारी
मधेपुरा बिहार

                  


Related Posts

माँ- डॉ. इन्दु कुमारी

February 14, 2022

माँ मां देती आंचल की छायाप्रेम की मूरत सी सुंदर कायाअगाध प्रेम की द्योतक रही वात्सल्य ह्रदय शोभनीय रही रब

यादें-जयश्री बिरमी

February 14, 2022

यादें जब आई न नींद खूब उधेड़े ताने बानेकुछ दिन ही नहीं कुछ महिनें ही नहींसालो तक पहुंचाईबचपन से हुई

आज फिर बसंत आई हैं-जयश्री बिरमी

February 14, 2022

आज फिर बसंत आई हैं पतझड़ की छोड़ चुन्नरआज बसंत ने फिर ली अंगड़ाई हैंहैं बरखा ऋतुओं की रानीबसंत भी

सांप्रदायिक सद्भाव, सौद्रह्यता भारत की खूबसूरती

February 14, 2022

सांप्रदायिक सद्भाव, सौद्रह्यता भारत की खूबसूरती सामाजिक सद्भाव, सौद्रह्यता, समरसता, मानवतावादी दृष्टि की सोच में युवाओं की ऊर्जा का सदुपयोग

जब वह चुप है- डॉ. माध्वी बोरसे!

February 14, 2022

जब वह चुप है! जब वह चुप है इंसान,क्यों कर रहा तू हर जगह बखान,निंदा करना सबसे बड़ा पाप,हर गलती

अंदाजा-डॉ. माध्वी बोरसे!

February 14, 2022

अंदाजा! ठहरा हुआ दरिया होता है बहुत गहरा ,मुस्कुराहट के पीछे भी हे एक खामोश चेहरा,किसी भी हस्ती को अंदाजे

Leave a Comment