Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, lekh

हिंसा करना, मारपीट ही नहीं है-डॉ. माध्वी बोरसे

हिंसा करना, मारपीट ही नहीं है! जी, बहुत से घर में हम देखते हैं, जहां किसी का बहुत ज्यादा अपमान …


हिंसा करना, मारपीट ही नहीं है!

हिंसा करना, मारपीट ही नहीं है-डॉ. माध्वी बोरसे
जी, बहुत से घर में हम देखते हैं, जहां किसी का बहुत ज्यादा अपमान होता है, खास तौर पर एक औरत का, जब आप उसे बार-बार यह कहते हैं, तुम्हें कुछ नहीं आता, तुम्हें आता ही क्या है, तुम कुछ नहीं कर सकती, जब बहुत सारे अपशब्द को उपयोग में लाते हैं, उसके स्वाभिमान को ठेस पहुंचाते हैं, पराए लोगो से संबंध बनाते हैं! मानसिक दर्द, अपमान, धोखा कभी भुलाया नहीं जा सकता, चाहे इंसान कितना ही आगे बढ़ जाए! याद रखिए, कभी-कभी आप जाने अनजाने में, अपने अभिमान में, अपने शौक को जीने मैं इतने मग्न हो जाते कि किसी को जिंदगी भर की पीड़ा दे जाते हैं और इसके बाद में दो-चार आंसू बहा देने से या माफी मांगने से वह पीड़ा कम नहीं होती और कुछ लोग तो अभिमान में इतने चूर होते हैं कि जब उनकी मृत्यु नजदीक होती है तब ही उन्हें समझ में आता है, की हमसे कोई गलती यह गुनाह भी हुआ!

स्वयं के साथ वक्त बिताए और जानिए ऐसे कौन-कौन से कर्म है जो हम किसी के साथ कर रहे हैं और हमें खुद के लिए मंजूर नहीं! जो हमें स्वयं के लिए मंजूर नहीं उसे आज से ही त्याग दीजिए, भूलिए मत पृथ्वी गोल है, कर्म अच्छे हो या बुरे दोबारा लौट के जरूर आते हैं!

आपको आज नहीं तो कल, इस बात का जरूर एहसास होता है, कि आपने किसी के साथ कितना गलत किया!
खुदा की मर्जी, जो जिसके लायक है उसे वही मिलेगा, इसे सोच कर अपने गलत कर्मों से बचने की कोशिश ना करें!
अगर जाने अनजाने में हमने किसी के साथ बुरा कर भी दीया, तो उनसे माफी मांगने के साथ-साथ, उनके साथ बहुत ज्यादा अच्छा करने की कोशिश कीजिए, कि शायद वो आपकी गलती को भूल जाएं, शायद उनके कुछ जख्म भर जाए!

आपको लगता है कि हमारी की गई गलती, किसी को दिया हुआ दर्द माफ हो सकता है, पर सोचिए अगर वह इंसान दुनिया के दिलों को जीत लेता है और सभी का पसंदीदा बन जाता है, कल को हर जगह या युगो युगो तक उसकी चर्चा होती है, तो भूलेगा नहीं की युगो युगो तक जिसने गलत कार्य किया है, उसका दिल दुखाया है, उसे तकलीफ पहुंचाई है, ऐसे अत्याचारी को कोई भी माफ नहीं करेगा, सभी के मुख से उसके लिए अच्छा नहीं निकलेगा, तो सोचिए उसकी आत्मा को शांति कब मिलेगी!
हम में से कोई यह नहीं चाहता है, पर चाहने और प्रयत्न करने में बहुत फर्क है, कोई भी इंसान कमजोर नहीं, कोई भी व्यक्ति डरपोक नहीं, बस बात इतनी सी है, की कुछ लोग छोटी-छोटी बातों को बड़ी नहीं बनाना चाहते और इसी कारण उनके लिए बड़ी बड़ी बातें छोटी हो जाती है, अगर एक औरत यह नहीं चाहती की उसके मां-बाप को या बच्चों को तकलीफ हो तो वह आपकी हर बात को नजरअंदाज करती रहती है, इसका मतलब यह नहीं कि आप कुछ भी बोलते रहें, आप उसके साथ कुछ भी करते रहे, खुदा सब देख रहा है और वह कर्मों का हिसाब शत प्रतिशत रखता है, दिखावा करना बंद करें, अगरबत्ती लगाने या उसके गुणगान गाने से पहले कुछ गुणों को अपने अंदर भी लाएं!

किसी का हौसला तोड़ना, किसी के स्वाभिमान को चोट पहुंचाना, किसी को आगे बढ़ने से रोकना, रोज रोज ताने मारना, बेइज्जत करना, किसी को मानसिक पीड़ा देना, घुट घुट के जीने पर मजबूर कर देना, अपने पति या पत्नी के होते हुए किसी गैर के साथ संबंध बनाना, किसी की आत्मा और मन पर चोट पहुंचाना, किसी के चरित्र पर उंगली उठाना, किसी के आत्मविश्वास को तोड़कर चकनाचूर कर देना, किसी के अस्तित्व पर वार करना, किसी को नीचा दिखाना यह सब भी हिंसा है!

हिंसा करने वाला हो या सहने वाला हो दोनों के अंदर ही एक कसक सी रह जाती है, दोनों ही दर्द में होते हैं!

चलो रहते हैं सब से प्रेम से, करते हैं पूरा विश्वास,
ना तोड़े अपनों का भरोसा, इतना हो हम मै सहास,
क्यों करें स्वयं को और किसी को उदास,
बस इतनी सी ही हे इस माध्वी की दरखास्त!!

डॉ. माध्वी बोरसे!
( स्वरचित व मौलिक रचना)
राजस्थान (रावतभाटा)


Related Posts

अपनी किस्मत अपने हाथ!

April 20, 2022

अपनी किस्मत अपने हाथ! जुआरी करते हैं,किस्मत की आजमाइश,निकम्मे करते हैं,बैठे-बैठे फरमाइश,पर जीवन की हकीकत,परिश्रम करने से ही होती हैपूरी,

ग्लोबल लॉ थिंकर्स सोसाइटी (जीएलटीएस)

April 20, 2022

 ग्लोबल लॉ थिंकर्स सोसाइटी (जीएलटीएस) वैश्विक नेटवर्किंग और नेतृत्व के लिए मंच है।   यह विश्व रिकॉर्ड धारक, बहु-पेशेवर, स्वैच्छिक, धर्मार्थ,

ईयर टू हियर का नई बुलंदियों पर पहुंचना

April 20, 2022

 सामाजिक पहल- ईयर टू हियर का नई बुलंदियों पर पहुंचना।  ऋचा मेहता की एक पहल। महिला एक मां, पत्नी, बहन,

भारत की गाथा

April 20, 2022

भारत की गाथा प्रधानमंत्री संग्रहालय – स्वतंत्रता के बाद सभी प्रधानमंत्रियों के जीवन और योगदान पर लिखी भारत की गाथा

हमारी आस्था, संस्कृति की धारा, सद्भाव, समभाव, समावेश की है

April 20, 2022

हमारी आस्था, संस्कृति की धारा, सद्भाव, समभाव, समावेश की है देश की बुनियादी नीव अमन चैन, सौहार्दपूर्ण वातावरण, भाईचारा तात्कालिक

आजकल संतति से विमुख हो रहे हैं युवा

April 20, 2022

आजकल संतति से विमुख हो रहे हैं युवा जब हम लोग छोटे थे तो सभी घरों में एक ही रिवाज

Leave a Comment