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kishan bhavnani, poem

हास्य कविता-ज़मीन के रिकॉर्ड में घालमेल करवाता हूं

हास्य कविता-ज़मीन के रिकॉर्ड में घालमेल करवाता हूं जमीन से शासन को चुना लगाने माहिर हूं शासन या रेल्वे में …


हास्य कविता-ज़मीन के रिकॉर्ड में घालमेल करवाता हूं

जमीन से शासन को चुना लगाने माहिर हूं
शासन या रेल्वे में जमीन अधिग्रहण मामले
में सफाई से लंबा चूना लगवाता हूं
जमीन के रिकॉर्ड में घालमेल करवाता हूं

रिकॉर्ड में पड़ित ज़मीन को सिंचित में करवाता हूं
डेढ़ गुना पाने का सिंचित ओलित लिखवाता हूं
पड़ित ज़मीन को एनए तक करवा देता हूं
जमीन के रिकॉर्ड में घालमेल करवाता हूं

अधिग्रहण नोटिस के पहले सेटिंग करता हूं
वैसी जमीन कौड़ियों में ले लेता हूं
पड़ित ज़मीन को ओलित एनए करवाता हूं
शासन को चुना लगवाता हूं

घालमेल काम में हरे गुलाबी बहुत लेता हूं
ऊपर नीचे आधा बाकी मैं लेता हूं
माहिर अधिकारियों की मिलीभगत से
ज़मीन के रिकॉर्ड में घालमेल करवाता हूं

शासकीय जमीन को निजी बहुत करवाता हूं
ऊपर की सेटिंग से लंबा चुना लगवाता हूं
रोजी रोटी वाली कुर्सी पद से दगाबाजी करवाता हूं
जमीन के रिकॉर्ड में घालमेल करवाता हूं

About author

Kishan sanmukh

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


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