Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jitendra_Kabir, poem

हालात बदलेंगे क्या?- जितेन्द्र ‘कबीर’

हालात बदलेंगे क्या? आज जब नारे बुलंद होंगेदुनिया भर मेंमहिलाओं की सुरक्षा के,बहुत सारी महिलाएं संघर्ष कर रही होंगीहवस के …


हालात बदलेंगे क्या?

हालात बदलेंगे क्या?- जितेन्द्र 'कबीर'

आज जब नारे बुलंद होंगे
दुनिया भर में
महिलाओं की सुरक्षा के,
बहुत सारी महिलाएं संघर्ष कर रही होंगी
हवस के पुजारियों के खिलाफ,
और फिर कल यही ज़माना
पूरे कपड़े पहनने, अकेले बाहर ना निकलने,
अपनी हद में रहने जैसी हिदायतें दे
उसे ही दोषी ठहरा
कर लेगा अपने कर्तव्य की इतिश्री।
आज जब अखबारें भरी होंगी
दुनिया भर में
महिलाओं के गुणगान से,
दहेज के लिए प्रताड़ित की जा रही होंगी
कई विवाहिताएं
या फिर कल होगी सूटकेस में बरामद
किसी महिला की लाश
समाज की नग्न चरित्र दिखाती हुई
और लोग लगा कर मुंह पर ताले
कर लेंगे अपने कर्तव्य की इतिश्री।
आज जब सरकारें कसीदे पढ़ेंगी
दुनिया भर में
महिलाओं के सम्मान में,
बहुत सी महिलाएं आवाज उठा रही होंगी
सरकारी तंत्र और नेताओं के शोषण के खिलाफ,
और फिर कल
अपने लोगों को बचाने के चक्कर में
देश के कर्णधार
खुली छूट देंगे पुलिस और मीडिया द्वारा
पीड़ित को ही मुजरिम ठहराने की मुहिम को,
और लोग सरकारी कफन से ढक कर
मृत जमीर को
कर लेंगे अपने कर्तव्य की इतिश्री।
जितेन्द्र ‘कबीर’

यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति-अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र- 7018558314


Related Posts

हर चेहरा कुछ कहता है-भावना ठाकर

May 24, 2022

 “हर चेहरा कुछ कहता है” हर इंसान के मन में उठते तरंगों को प्रतिबिंबित करता आईना है चेहरा, अपनों की

परम शक्ति!

May 17, 2022

परम शक्ति! किस बात का गुरूर है तुझे इंसान,तू इतना भी हे नहीं महान,करने वाला वह, कराने वाला वह,वही चला

सुरम्य एवं सहज जीवन!

May 17, 2022

सुरम्य एवं सहज जीवन! गुरुर में रास्ते धुंधले पड़ जाएंगे,खुद के अलावा किसी को कैसे देख पाएंगे,प्रेम और जुनून के

मार्मिक कविता – कश्मीर में शहीदों की कुर्बानी कब तक़

May 17, 2022

मार्मिक कविता -कश्मीर में शहीदों की कुर्बानी कब तक कश्मीर में शहीदों की कुर्बानी से आंखें सभकी भर आई वो

धूप छांव

May 15, 2022

धूप छांव जिंदगी के रूप कई कहीं मिले धूप छांव आती दुःख की धूप तो सुख की छांव भी अपार

माँ-हरविंदर सिंह ‘ग़ुलाम’

May 14, 2022

माँ सुना देवताओं के बारे में अक्सरमगर देव कोई कभी भी न आया लगी ठोकरें जब ज़माने की मुझको हर

PreviousNext

Leave a Comment