Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

हाय रे गंतव्य जीवन – डॉ हरे कृष्ण मिश्र

 हाय रे गंतव्य जीवन चली अचानक गई यहां से, जिसका कोई विश्वास नहीं, अंधकार में टटोल रहा हो , जैसे …


 हाय रे गंतव्य जीवन

हाय रे गंतव्य जीवन - डॉ हरे कृष्ण मिश्र

चली अचानक गई यहां से,

जिसका कोई विश्वास नहीं,

अंधकार में टटोल रहा हो ,

जैसे राही गंतव्य मार्ग को ।।

बाल अरुण के रथ पर देखा,

बैठ  चली दूर तुम हम से ,

 एहसास नहीं कह पाता हूं,

 निशब्द बना अपना जीवन ।।

जीने का कोई अर्थ तो होता ,

मैं भी रोता  चुपके चुपके ,

जाने अनजाने में किसको ,

दर्द बांट दूं बोलो अपना ।।

काश कोई तो पास में होता,

अपना जी मैं हल्का करता ,

गम नहीं कोई दर्द बांटने ,

पास खड़ा कोई मेरा होता ।।

कहने को जीवन है अपना,

एकांत मुझे अच्छा लगता है,

तेरी पीड़ा में अनुभव करता ,

गम होता है साथी  अपना ।।

बहुत दूर तुम जा बैठी हो ,

नहीं है कोई और ठिकाना,

बीते दिन को  गिन लेता हूं,

कल पर करता नहीं भरोसा ।।

आज लिखूंगा दर्द तुम्हारा ,

पर गीत नहीं  मैं गा पाऊंगा,

लिखने को मैं लिख लेता हूं ,

पढ़ने पर आंसू आते  हैं ।।

बड़ी विवशता मेरे जीवन की ,

काश किसी से कह पाता मैं,

जन्म जन्म का साथी तुम ही ,

फिर बनी हुई  बेचैनी  कैसी  ।।??

आकुल अंतर उथल-पुथल है,

जीने का क्रम बचा कहां है ,

सोच सोच कर घबड़ाता हूं ,

क्या जीने का और राह है ??

व्याकुलता  रही है मेरी ,

धरती की  कैसी  बेचैनी,

कहने और सुनने  का ,

 बचा अब दर्द  मेरा है ।।

अपने गीतों के शब्दों में,

तेरे दर्दों को पिरोता हूं,

सरल शब्दों में कहता हूं,

अपना सब कुछ खोया हूं ।।

दिया था  स्नेह जो तूने ,

वही तो मेरी दौलत है ,

पाने की ना और कोई,

बचा दिल में तमन्ना है ।।

नदी के दो किनारे हम,

मिलेंगे सिंधु तट जाकर,

इधर जलधार में बहकर,

चलेंगे जिंदगी  भर हम ।।

मौलिक रचना 
                डॉ हरे कृष्ण मिश्र
                बोकारो स्टील सिटी
                झारखंड ।


Related Posts

नम्र बनके रहो हर खुशहाल पल तुम्हारा है

March 4, 2023

भावनानी के भाव नम्र बनके रहो हर खुशहाल पल तुम्हारा है बुजुर्गों ने कहा यह जीवन का सहारा है सामने

धर्म और जाति की आड़ में छिपता हूं

March 4, 2023

भावनानी के व्यंग्यात्मक भाव धर्म और जाति की आड़ में छिपता हूं आज के बढ़ते ट्रेंड की ओर बढ़ रहा

हे परमपिता परमेश्वर

March 4, 2023

भावनानी के भाव हे परमपिता परमेश्वर आपके द्वारा दिए इस जीवन में इन मुस्कुराहटों का हम पर एहसान है हर

हे परवरदिगार मेरे मालिक

March 4, 2023

 भावनानी के भाव हे परवरदिगार मेरे मालिक मैंने कहा गुनहगार हूं मैं  उसने कहा बक्ष दूंगा  मैंने कहा परेशान हूं

कविता: भारतीय संस्कृति में नारी | bharatiya sanskriti me naari

February 16, 2023

 भावनानी के भाव कविता:भारतीय संस्कृति में नारी  भारतीय संस्कृति में नारी  लक्ष्मी सरस्वती पार्वती की रूप होती है समय आने

वैश्विक पटल पर भारत तीव्रता से बढ़ रहा है

February 16, 2023

 भावनानी के भाव वैश्विक पटल पर भारत तीव्रता से बढ़ रहा है रक्षा क्षेत्र में समझौतों के झंडे गाड़ रहे

PreviousNext

Leave a Comment