Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, poem

हां ये तपिश हैं

हां ये तपिश हैं ठंडे न होंगे ये सिने जिसमे हैं दहकलाखों में न सही हजारों में हीललकार हैं प्रतिकार …


हां ये तपिश हैं

हां ये तपिश हैं
ठंडे न होंगे ये सिने जिसमे हैं दहक
लाखों में न सही हजारों में ही
ललकार हैं प्रतिकार हैं और है चाह–ए– वतन
न तब जुके थे न ही अब जुकेंगे
दुनियां को दिखा दिए हैं दिमागी जलवे
अब करामात देखना हम ही सब से आगे होंगे
थे अव्वल ये सब जन गए हैं
अव्वल होंगे अब भी ये पहचान लेंगे
जिंदा दिलों की तपिश ही करेगी उजाले
हमारी तरक्कियो की
बस कमी हैं तो उन अंचलों की
जो थी जीजाबाई की लोरियों में
और अहिल्या के घोड़ों की चापों में
जो वीरांगनाएं वीर को जन्म दे वीर ही बनती थी
नहीं हैं अब वह आंचल और न ही वे घोड़े
किंतु करोड़ों मानव रथ है
आज सपने वहीं संजोए
बस चाहिए तो अग्रणियों का दिशा सुचन
गुरु चाहिए चाणक्य और रामदास जैसे
जिसने दशा दिशा संभाली थी
आओ आज, हां आओ आज सभी जीजाबाई,अहल्या, चाणक्य और रामदास भी
जाग गयें हैं आज हम अब नहीं इंतजार
हमारे राष्ट्रीय पर्वों का
न क्षणिक हैं अब हमारा
जज्बा–ए– वतन
उठ चुके हैं टूटी हैं निंद्रा
खामोशी की तंद्रा छोड़
उगेगा सूरज इक दिन हमारी ही तपिशों से
खड़े राह में शिवाजी और चंद्रगुप्त महान भी
पुकार रहें हैं आज वो शिष्य
अपने गुरु जनों को
सिखाओ आज जो सिखाया हैं सदियों से संसार को

जयश्री बिरमी
अहमदाबाद


Related Posts

शहीद कविता-नंदिनी लहेजा

December 9, 2021

शहीद शत नमन, आपके जीवन को,जिसे आपने, देश के नाम किया।हैं धन्य हमारे, वीर जवान,जिन्होंने प्राणों का, अपने दान किया।

कोई हल तो होगा- जितेन्द्र ‘ कबीर ‘

December 8, 2021

कोई हल तो होगा भुखमरी मिटाने के लाख दावों के बावजूदनाकाम रही हैं सरकारें अब तकसब लोगों तक दो जून

कुर्सी का चक्कर है प्यारे .- विजय लक्ष्मी पाण्डेय

December 8, 2021

कुर्सी का चक्कर है प्यारे …!!! गढ़नें वाले गढ़ते रहे विपक्ष -पक्ष की बातें ।कितनें पीछे छूट गए ना लिखी

डॉ. राजेंद्र प्रसाद- सुधीर श्रीवास्तव

December 8, 2021

डॉ. राजेंद्र प्रसाद जीरादेई सीवान बिहार मेंतीन दिसंबर अठारह सौ चौरासी में,जन्मा था एक लाल।दुनिया में चमका नाम उसका,थे वो

दोनों बातें खतरनाक हैं- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 8, 2021

 दोनों बातें खतरनाक हैं किसी परिवार का मुखियापरिवार के किसी सदस्य कीनाराजगी के डर सेचुप्पी साध लेता है जबअपने परिवार

सूनापन अखरता”- अनीता शर्मा

December 8, 2021

सूनापन अखरता अकेले चुपचाप खड़ी हो ,देख रही थी,जहाँ दुनिया बसती थी । सूनापन पसरा था कमरे में,जहाँ रौनक रहती

Leave a Comment