Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, poem

हवाओं से बात- डॉ. माध्वी बोरसे!

हवाओं से बात! सनन सनन सी हवा मैं सांस लेते हुए खुलकर, जीते हैं अपने सारे दुख गम को भूल …


हवाओं से बात!

हवाओं से बात- डॉ. माध्वी बोरसे!
सनन सनन सी हवा मैं सांस लेते हुए खुलकर,

जीते हैं अपने सारे दुख गम को भूल कर,
जिंदगी बहुत अजीज है यारों,
मजा लेते हैं हर पल का, ठंडी ठंडी हवा में घुल कर!

लहराए स्वयं को, इस ठंडी हवा के झोंके में,
क्यों इतने समय से, तू अपने मन को रोके हे,
आजाद हो जा खुले पंछी की तरह,
देख, इस प्रकृति के रूप अनोखे हैं!

इस हवा की खुशबू में, चलो हम सब भी खोते हैं,
अपनी जिंदगी को, महक से संजोते हैं,
हरियाली लाए, हरियाली में जाए,
लहराए हवाओं की तरह, क्यों ज्यादा सोचते हैं!

सनन सनन सी हवा मैं सांस लेते हुए खुलकर,
जीते हैं अपने सारे दुख गम को भूल कर,
जिंदगी बहुत अजीज है यारों,
मजा लेते हैं हर पल का, ठंडी ठंडी हवा में घुल कर!

डॉ. माध्वी बोरसे!
( स्वरचित व मौलिक रचना)
राजस्थान (रावतभाटा)


Related Posts

आज फिर देखा चांद- जयश्री बिरमी

December 3, 2021

आज फिर देखा चांद सुबह से भूखी प्यासी सीडोल रही थी गली गली कोई भी न था राजी देने को

तुम हमारी कामना – डॉ हरे कृष्ण मिश्र

December 3, 2021

तुम हमारी कामना संभावना से कौन करता ,कब कहां इनकार है ,प्रेम का परिणाम होगा ,दर्द का अभिशाप अपना।। शालीन

सत्य है क्या?- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 3, 2021

सत्य है क्या? सत्य! जैसा सोचा किसी ने, सत्य! जैसा बोला किसी ने, सत्य!जैसा लिखा किसी ने, सत्य!जैसा पढ़ा किसी

जरूरत है जागरूक बनने की- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 3, 2021

जरूरत है जागरूक बनने की देखकर उन्हें आनी चाहिएआम जनता में सुरक्षित होने की भावना,निकल जाना चाहिए डर मन सेगुण्डों,

सहनशीलता- सुधीर श्रीवास्तव

December 3, 2021

 सहनशीलता कैसा जमाना आ गया है ज्यों ज्यों शिक्षा का स्तर बढ़ रहा हैहम विकास की ओर बढ़ रहे हैं,हमारी

देश का दुर्भाग्य- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 3, 2021

 देश का दुर्भाग्य कृषि के लिए नीतियां बनाने मेंकृषक का प्रतिनिधित्व नहीं, शिक्षा के लिए नीतियां बनाने मेंशिक्षक का प्रतिनिधित्व

Leave a Comment