Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Bhawna_thaker, poem

हर चेहरा कुछ कहता है-भावना ठाकर

 “हर चेहरा कुछ कहता है” हर इंसान के मन में उठते तरंगों को प्रतिबिंबित करता आईना है चेहरा, अपनों की …


 “हर चेहरा कुछ कहता है”

हर चेहरा कुछ कहता है-भावना ठाकर

हर इंसान के मन में उठते तरंगों को प्रतिबिंबित करता आईना है चेहरा, अपनों की आवाज़ सुनकर गुनगुनाता है चेहरा तो अपनों की दूरी पर मुरझा जाता है चेहरा..

तन के भीतर भले धधकती आग छुपी हो हो उस आग पर सुकून का आबशार उड़ेलने में माहिर होता है एक सुलझा हुआ गंभीर चेहरा..

मुखौटा विहीन एक चेहरा कितनी भाषाओं को जन्म देता है कोई नहीं जानता, भाषाओं की संज्ञाओं का सार होता है चेहरा..

नखशिख उठते हर भावों का किरदार निभाता है चेहरा, तो कभी हर भाव पर पर्दा डालते सबकुछ छुपा लेता है चेहरा..यूँ कभी खुशियों का दूत तो कभी दर्द का डाकिया बन जाता है चेहरा..

असंख्य भावों की तस्वीरें टंगी होती है चेहरे के हर अंगों में,

आँखों में झाँको तो आँखें सारे राज़ खोल देती है..मन से उठते अमर्ष को तोड़ने का मारतौल होता है चेहरा..

हंसी पर विराट होते गालों की सुर्खियाँ देखी है कभी? खुशियों की फ़सलें लहलहाते कहती है मेरा हमराज़ है चेहरा..

वेदनाओं का सार, खुशियों की बारिश और अभिव्यक्तियों की ढ़ेरों व्यंजनाएं आँखों की पुतलियों पर मली होती है.. 

चेहरे की रचना कुछ यूँ बयाँ करती है भावों को.. 

भाल पर शिकन संघर्षों की गाथा कहते परिवार की चिंता को परोस रही होती है..

तो रीढ़ का बोझ बयाँ करता है झुर्रियों का झुरमुट..

लबों पर पड़ा मौन मुखरित न हो जाए कहीं उस एहसास का पहरेदार होता है चेहरा..

नासिका बड़ी नखरिली हर गंध को परख लेती है अनमने अहसासों पर नखचढ़ी कहलाती है..

हुनर होता है हर चेहरे का अपना, कुछ भी न कहते भी बहुत कुछ कह जाता है चेहरा..

गर पढ़ने की कला सीख लो तो हर चेहरे के पीछे कई गहन कहानियां छुपी होती है, सच पूछो तो इंसानों के एहसास का वर्णन करता इतिहास होता है चेहरा।

भावना ठाकर ‘भावु’ बेंगलोर


Related Posts

Bhavnaye liye by siddharth pandey

June 27, 2021

 भावनाएं लिए फिर रहे दर बदर भावनाएं लिए। तुम अपने लिए हम पराये लिए। आदमी आदमी को पहचानता कहाँ अब

Sapne by shri shiv narayan jauhari vimal

June 27, 2021

 सपने दो आँख चिपका दी गई हैं हरेक चहरे पर पढो दस्तावेज दुनिया की चित्रपट देखो और सुलझाओ पहेली दीन

Bharat varsh by arun kumar shukla

June 27, 2021

 शीर्षक- भारत वर्ष मस्तक दिव्य हिमालय जिसका, पांव धुले नितसागर इसका। हृदय भाग में बहती है नित , गंगा यमुना

karm hi Ishwar by kamal siwani bihar

June 27, 2021

                      कर्म ही ईश्वर   क्या ईश्वर  मिलता  है  हमको ,

kavita Sandeh by sudhir srivastav

June 27, 2021

 संदेह संदेह के बादल एक बार घिर आये, तो सच मानिए कि फिर कभी न छंट पाये,  मान लिया छंट

bihadon ki bandook by priya gaud

June 27, 2021

 “बीहड़ों की बंदूक” बीहड़ों में जब उठती हैं बंदूकें दागी जाती हैं गोलियां उन बंदूकों की चिंगारी के बल पर

Leave a Comment