Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, poem

हम अपनी जड़ों को भूल ना जाए

कविता हम अपनी जड़ों को भूल ना जाए पारंपरिक कला शैलियों को कायम रखने हम ऐसा मिलकर रास्ता अपनाएं बेहतर …


कविता
हम अपनी जड़ों को भूल ना जाए

हम अपनी जड़ों को भूल ना जाए
पारंपरिक कला शैलियों को कायम रखने

हम ऐसा मिलकर रास्ता अपनाएं
बेहतर जिंदगी की तलाश में
हम अपनी जड़ों को भूल ना जाएं

हम देख रहे हैं कैसे शहरीकरण स्वदेशी
लोककला शैलियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं
बड़े बुजुर्गों की बातों को छोड़
पाश्चात्य संस्कृति अपना रहे है

आओ साथ मिलकर जन जागरण कराएं
हमारी परम्पाओं कलाकृतियों में आस्था दर्शाए
लड़ना होगा हमें पाश्चात्य संस्कृति से
हम अपनी जड़ों को भूल ना जाएं

भारत संस्कृति का ख़जाना है यह कम ना हो पाए
घरघर में भारतीय संस्कृति अपनाने मंत्र दिलाएं
बच्चों में भारतीय संस्कृति के प्रति प्रोत्साहन
करवाएं हम अपनी जड़ों को भूल न जाएं

लेखक- कर विशेषज्ञ, साहित्यकार, कानूनी लेखक, 

चिंतक, कवि, एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

Related Posts

साहित्यकार महान

June 4, 2022

 साहित्यकार महान शब्दों के महाजाल का चक्रव्यूह बड़ा जंजाल इसमें उलझ सुलझ बने तीखे शब्द विकार लेखक है रोक ना

मदर अर्थ, पृथ्वी!

June 4, 2022

 मदर अर्थ, पृथ्वी! मैं हूं सौरमंडल की सबसे सुंदर ग्रह,जहां जीव जंतु का जीवन है संभव,निवास करती है मुझ में

शिकायतें ना करें!

June 4, 2022

 शिकायतें ना करें! क्यों करें किसी से शिकायत, क्या स्वयं हे हम इसके लायक, खुद को आईने मैं झांके तो,

संपूर्ण निष्ठा!

June 4, 2022

 संपूर्ण निष्ठा! बुरा वक्त दर्द दे जाता है, अच्छे वक्त की उम्मीद भी लाता है, दोनों का एहसास भी जरूरी

बढ़ती आधुनिक सुविधाएं – गिरता स्वास्थ्य

June 4, 2022

 बढ़ती आधुनिक सुविधाएं – गिरता स्वास्थ्य  बढ़ती आधुनिक सुविधाओं से गिरता मानवीय स्वास्थ्य और बदलते स्वभाव को रेखांकित करना ज़रूरी 

क्रोध विकराल परिस्थितियों का जन्मदाता!!

June 4, 2022

 क्रोध विकराल परिस्थितियों का जन्मदाता!!  हमारा गुस्सा और क्रोध हमारे जीवन की सभी समस्याओं की वजह में से एक है 

Leave a Comment