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Jitendra_Kabir, poem

हमेशा के लिए कुछ भी नहीं-जितेन्द्र ‘कबीर’

हमेशा के लिए कुछ भी नहीं न यह जीत आखिरी हैऔर न यह हार आखिरी है,रोजाना का संघर्ष है जीवनचलेगा …


हमेशा के लिए कुछ भी नहीं

हमेशा के लिए कुछ भी नहीं-जितेन्द्र 'कबीर'

न यह जीत आखिरी है
और न यह हार आखिरी है,
रोजाना का संघर्ष है जीवन
चलेगा यह ऐसे ही
जब तक हमारी सांस आखिरी है।
जीत से अहंकार न हो
और हार से न टूटे हौसला,
सफलता का यह विचार
आखिरी है,
उम्मीद का सूरज उगा
हर नये दिन के साथ,
हार कर मत बैठ
कि अंधेरे की यह रात आखिरी है।
छूट जाएगा वो सब कुछ यहीं
जीत से जो हासिल किया,
वो सब कुछ भी तो पाया था यहीं
हार कर जो गंवा दिया,
हमेशा के लिए कुछ भी नहीं
मन की संतुष्टि के लिए
यह आधार आखिरी है,
परिस्थितियों को अपने अनुकूल बना लें
या फिर उनके हिसाब से
खुद को लें ढाल,
सुखी जीवन के लिए यह सिद्धांत
आखिरी है।
जितेन्द्र ‘कबीर’

यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति – अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


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