Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, lekh

हमारे लिए कितना प्रासंगिक हैं वेलेंटाइन डे?

हमारे लिए कितना प्रासंगिक हैं वेलेंटाइन डे? क्यों किसी भी बात पर हम दिनों को तय कर उसे मानते हैं।जैसे …


हमारे लिए कितना प्रासंगिक हैं वेलेंटाइन डे?

हमारे लिए कितना प्रासंगिक हैं वेलेंटाइन डे?
क्यों किसी भी बात पर हम दिनों को तय कर उसे मानते हैं।जैसे बाल दिन,क्यों बच्चों को एक ही दिन के लिए महत्व दिया जाएं? हमारा भविष्य हैं जो,उन्हे तो हर दिन हर पल ,हर हिसाब से संभाला जाना चाहिए।शारीरिक,मानसिक,शैक्षणिक सभी पासो को संभाल उनका सर्वांगी विकास ही देश को एक अच्छा नागरिक दे सकता हैं।

ऐसे ही हम कुछ दिन मनाते हैं जिसे हम वेलेंटाइन डे जो आजकल एक सप्ताह के लिए मनाते हैं।जिसको हम थोड़े अलग तरीके से मनाते हैं।वेलेंटाइन डे के दिन सिर्फ प्रेमियों में नहीं मनाया जाता हैं, इसमें प्रेम संदेश हैं जो कोई भी रिश्ता हो उसी में मनाया जाना चाहिए, उसमें भाई– बहन हो,दो दोस्त हो, मां के साथ,पिता के साथ या कोई भी हो,पड़ोसी भी सकता हैं ,मनाया जाता हैं।उसे हम थोड़े संकीर्ण हो के गलत अंदाज से मनाते हैं या उसके मायने समझते हैं।उसे एक विस्तृत नजरिए से देखें तो सही मतलब में मनाया जा सकता हैं।
कभी चॉकलेट डे,भालू डे,हग डे और भी बहुत कुछ,लेकिन उसमे कहां हैं अपने शीरी– फरहाद,शशि–पुन्नू और लैला मजनूं जिन्होंने अपनी हस्ती मिटा दी अपने प्यार के लिए।ऐसे तो कई उदाहरण हैं जिनके प्यार के चर्चे सदियों से दुनिया में हो रहे हैं।सबसे पुरानी और प्रचलित प्रेम कथा तो राधा किशन की हैं।बचपन से जो प्यार पनपा था और एक प्रार्थना बनके पूजा जाने लगा।एक अप्रतिम भावनाओं से भरी हुई ये कथा सर्व वंदनीय हैं।जिसमें भक्ति हैं,समर्पण हैं,त्याग हैं और सबसे ज्यादा स्वार्थ रहित प्रेम जिसे गोप,गोपियों और गैयाओं के साथ भी जोड़ा और बांटा गया।जिसमे संगीत से की गई अभिव्यक्तियां अप्रतिम हैं।किशन की बंसी की तान सुनकर राधा के साथ साथ गोपियां, गायेंं,गोप,मोर,यहां तक की वन के वृक्ष भी नृत्य कर उठते थे ।यही तो प्यार की चरम सीमा थी किशन की लीला की।सभी को ही मंत्र मुग्ध करने वाले किशन और उसकी बाल लीलाओं से शुरू हुई प्रेम कथा निस्वार्थ थी।और उसी प्रेम ने रुकमणि के होते हुए भी किशन के साथ राधा की पूजा एक ऐसा उदाहरण हैं जो कहीं देखने नहीं मिलता।वहीं किशन का रुकमणि से प्यार भी उनके वैवाहिक जीवन की प्रेम कथा का वर्णन करता हैं।प्रेम वश रुकमणि का हरण कर के अपनी रानी बना के सिंहासन पर अपने साथ स्थापित करना एक चरम की प्रतीति करवाता हैं।
वहीं प्रेम में भक्ति की अनुभूति करवाने वाली मीरा को अपने किशन पर जो भक्ति भावना थी उसका तो कोई दूसरा उदाहरण मिलना मुश्किल हैं। मीरा ने किशन को प्रेम प्रतीक मन पूजा हैं,” मेरो तो गिरधर गोपाल दुर्सी न कोई”।जब मीरा को सांसार में लिप्त करने की कोशिश की गई तब मीरा ने उपरोक्त पंक्तियां कही थी।कितने दुःख सहे मीरा ने,यहां तक की जहर भी पी लिया और उसकी प्रेम भक्ति के बल पर वह विष भी अमृत बना और मीरा को मारने की सारी कोशिशें विफल हो गई ।
तो द्रौपदी के साथ जो किशन का सखा भाव था उसे भी हम जानते हैं। द्रौपदी के कष्ट के सभी समय पर हाजर हो हर समय पर उसे सलाह देने वाले सखा के साथ एक अप्रतिम रिश्ता जिसे कोई खास नाम नहीं दिया जाता किंतु एक ऐसा प्रेम हैं जिसने द्रौपदी को सहारा भी दिया और सलाह भी दी जिससे जिंदगी के सभी प्रश्नों के हल दैवी शक्तियों से संपन्न श्री कृष्ण से मिलता रहा।भगवान कृष्ण के साथ जिसने भी प्रीत की वे सभी उनके साथ साथ प्रात: स्मरणीय बने और पूजा की जाने लगी।
अब बताएं कहां जरूरत हैं हैं किसी खास दिन की,जहां हम किशन की पूजा रोज ही करते हैं।यहां तो अभिवादन में ही जय श्री कृष्ण,किशनजी की जय रोज ही बोला करते हैं वहीं समय हैं कि हम एक अप्रतिम सर्व व्यापी प्रेम की उपासना करते हैं।

जयश्री बिरमी
अहमदाबाद


Related Posts

रिलेशनशिप में बोले जाने वाले ये झूठ तोड़ देते हैं दिल

December 22, 2022

रिलेशनशिप में बोले जाने वाले ये झूठ तोड़ देते हैं दिल कोई आप से पूछे कि रिलेशनशिप में सब से

सरपंचपति खत्म कर रहे महिलाओं की राजनीति

December 22, 2022

सरपंचपति खत्म कर रहे महिलाओं की राजनीति सरपंच पति प्रथा ने महिलाओ को पहले जहा थी वही लाकर खड़ा कर

भारत के राज्यों और ज़िलों का सामाजिक प्रगति सूचकांक 2022 जारी

December 22, 2022

भारत के राज्यों और ज़िलों का सामाजिक प्रगति सूचकांक 2022 जारी सामाजिक प्रगति सूचकांक (एसपीआई) 2022 यह रिपोर्ट राज्य और

क्या आरटीआई अधिनियम अपने उद्देश्य को पूरा कर रहा है?

December 20, 2022

क्या आरटीआई अधिनियम अपने उद्देश्य को पूरा कर रहा है? सरकार से पर्याप्त धन प्राप्त करने वाले कई निकायों के

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों में आत्महत्या के बढ़ते मामले।

December 20, 2022

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों में आत्महत्या के बढ़ते मामले। जब तक देश की परीक्षा संस्कृति से इस

जाति व्यवस्था से ज्यादा हीन या श्रेष्ठ मानना एक समस्या है।

December 18, 2022

जाति व्यवस्था से ज्यादा हीन या श्रेष्ठ मानना एक समस्या है। जाति आधारित व्यवसाय कोई समस्या नहीं है लेकिन एक

PreviousNext

Leave a Comment