Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, lekh

हमारी भाषाई विविधता हमारी शक्ति है

हमारी भाषाई विविधता हमारी शक्ति है हर भारतीय भाषा का गौरवशाली इतिहास, समृद्धि, साहित्य, भाषाई विविधता हमारी शक्ति है भारतीय …


हमारी भाषाई विविधता हमारी शक्ति है

हमारी भाषाई विविधता हमारी शक्ति है
हर भारतीय भाषा का गौरवशाली इतिहास, समृद्धि, साहित्य, भाषाई विविधता हमारी शक्ति है

भारतीय अनेकता में एकता की भाषाई मिठास से वैश्विक स्तर पर भारतीय साहित्य की प्रतिष्ठा बढ़ी – एड किशन भावनानी

गोंदिया – भारत हजारों वर्ष पूर्व से अपनी अनमोल विशेषताओं का धनी रहा है। भारत में अनमोल विशाल प्राकृतिक संपदा, अनमोल संस्कृति, साहित्य, ज्ञान, भाषाई विविधता का ख़जाना भरा है। यह देखकर ऐसा महसूस होता है कि सारी सृष्टि में मां सरस्वती ने भारत पर अनमोल कृपा बरसाई है, क्योंकि ऐसा बेजोड़ खजाना शायद ही वैश्विक रूप से किसी देश में होगा ऐसा मेरा मानना है।

साथियों बात अगर हम इस अनमोल ख़जाने की करें तो हम सब 135 करोड़ जनसंख्याकिय तंत्र को गंभीरता से रेखांकित कर इसका लाभ उठाना होगा क्योंकि यह हमारी अनमोल धरोहर और शक्ति भी है तथा आत्मनिर्भर भारत बनाने की अनमोल कड़ियों में से यह भी एक है जिसके आधार पर हमें आत्मनिर्भर भारत में अनमोल सहयोग व ताकत प्राप्त होगी।
साथियों बात अगर हम हमारी भाषाई विविधता की करें तो हर भारतीय भाषा का गौरवशाली अनमोल इतिहास, समृद्धि, साहित्य भाषा योग्यता है जो हमारी शक्ति है और अनेकता में एकता की भाषा की मिठास से वैश्विक स्तरपर
भारतीय साहित्य के साथ-साथ भारत की प्रतिष्ठा भी बड़ी है।

साथियों बात अगर हम उपरोक्त भाषाई ख़जाने को रेखांकित करने के महत्व की करें तो भारतीय बौद्धिक क्षमता विश्व प्रसिद्ध है और 135 करोड़ जनसंख्यकीय तंत्र में हर व्यक्ति के पास अपने ढंग की एक विशेष कला है जो उसे उनके भाषाई इतिहास,साहित्य, पूर्वजों से मिली है जिसका उपयोग करने के लिए उनके पास उचित और पर्याप्त प्लेटफार्म नहीं है और अगर है भी तो सभी के लिए नहीं है कुछ ही लोगों के लिए है जिसे हमें रेखांकित कर उनके लिए अपना कौशल दिखाने विश्वविद्यालय स्तरपर ग्रामीण क्षेत्रों में भाषाई विविधता के कड़ियों को जोड़ने एक अभियान चलाना होगा और उस कौशल को बाहर निकालकर हमें तराशना होगा और आत्मनिर्भर भारत में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
साथियों बात अगर हम भाषाई विविधता को एक माला में पिरोने की करें तो इसमें राजभाषा हिंदी को एक सखी के रूप में प्रयोग करना होगा और हमारी भाषाई विविधता को हमारी शक्ति बनाना होगा।
साथियों बात अगर हम दिनांक 4 जनवरी 2020 को माननीय उपराष्ट्रपति द्वारा एक कार्यक्रम में संबोधन की करें तो पीआईबी के अनुसार उन्होंने भी कहा कि हर भारतीय भाषा का गौरवशाली इतिहास है, समृद्ध साहित्य है, हम सौभाग्यशाली हैं कि हमारे देश में भाषाई विविधता है। हमारी भाषाई विविधता हमारी शक्ति है क्योंकि हमारी भाषाएं हमारी सांस्कृतिक एकता को अभिव्यक्त करती हैं। इस संदर्भ में उन्होंने युवा छात्रों से संप्रदाय, जन्म, क्षेत्र, लैंगिक विभेद, भाषा आदि भेदभावों से ऊपर उठकर देश की एकता को मजबूत करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि एक सभ्य समाज से यही अपेक्षित है कि उसकी भाषा सौम्य, सुसंस्कृत और सृजनशील हो। उन्होंने विश्वविद्यालयों से अपेक्षा की कि वे यह संस्कार डालें कि साहित्य लेखन से समाज में सभ्य संवाद समृद्ध हो, ना कि विवाद पैदा हो। हम अपनी अभिव्यक्ति की आज़ादी को भाषा की मर्यादा और समाज के अनुशासन में रह कर प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि विदेशों में फैले प्रवासी भारतीय समुदाय तथा विश्व के अन्य हिंदी भाषी देशों को, मातृभूमि भारत से जोड़े रखने में हमारी भारतीय भाषाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
इस संदर्भमें उन्होंने विश्वविद्यालयों से आग्रह किया कि वे हिंदी भाषी देशों और प्रवासी भारतीय समुदायके लेखकों की साहित्यिक कृतियों को अपने बौद्धिक विमर्श में शामिल करें। हमारी भाषाई विविधता को देश की शक्ति बताते हुए,उन्होंनेइस विविधता में एकता के सूत्र को मजबूत करने का आग्रह किया और कहाकि इसके लिए ज़रूरीहै कि भाषाओं में आपस में संवाद बढ़े। उन्होंने कहा कि इस कार्य में विश्वविद्यालयों के भाषा विभागों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। विश्वविद्यालयों के भाषा विभागों के बीच निरंतर संपर्क और बौद्धिक संवाद रहना चाहिए।भारतीय भाषाओं में हो रहे लेखन और प्रयोगों पर विचार होना चाहिए तथा उन्हें विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए।
विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने हिंदी साहित्य की अनेक विख्यात रचनाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराया है, जिससे दूर देशों में बैठे हिंदी के पाठक हिंदी का प्रामाणिक साहित्य पढ़ सकें। इस संदर्भ में उन्होंने आग्रह किया कि हिंदी के साथ साथ अन्य भारतीय भाषाओं के साहित्य का हिंदी में भी सरल और सरस अनुवाद ऑनलाइन उपलब्ध कराएं। जिससे विश्व भारतीय भाषाओं के समृद्ध साहित्य से परिचित हो सके।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि हमारी भाषाई विविधता हमारी शक्ति है। हर भारतीय भाषा का गौरवशाली इतिहास, समृद्धि, साहित्य, भाषाई विविधता हमारी शक्ति है तथा भारतीय अनेकता में एकता की भाषाई मिठास से वैश्विक स्तर पर भारतीय साहित्य की प्रतिष्ठा बड़ी है।

-संकलनकर्ता लेखक- कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


Related Posts

हे मेरे ईश्वर अल्लाह, परवरदिगार मेरे मालिक

May 11, 2023

हे मेरे ईश्वर अल्लाह, परवरदिगार मेरे मालिक मैंने कहा गुनहगार हूं मैं उसने कहा बक्ष दूंगा मैंने कहा परेशान हूं

दुःख में कारण नहीं समाधान तलाशें

May 10, 2023

दुःख में कारण नहीं समाधान तलाशें आज के समय में अगर किसी भी व्यक्ति से पूछा जाय कि वह जीवन

कश्मीर घाटी की वादियों में दाखिल होंगे दुनियां के दिग्गज

May 10, 2023

कश्मीर घाटी की वादियों में दाखिल होंगे दुनियां के दिग्गज ! जी-20 पर्यटन कार्यसमूह सम्मिट कश्मीर श्रीनगर- 23-24 मई 2023

वैश्विक चिंतनीय अर्थव्यवस्था बनाम भारतीय सुदृढ़ अर्थव्यवस्था

May 10, 2023

वैश्विक चिंतनीय अर्थव्यवस्था बनाम भारतीय सुदृढ़ अर्थव्यवस्था वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद (एफ़एसडीसी) की 27 वीं बैठक में वित्तीय प्रणाली

The kerala story movie|द केरल स्टोरी – टैक्स फ़्री बनाम बैन

May 10, 2023

द केरल स्टोरी – टैक्स फ़्री बनाम बैन फिल्म में डिस्क्लेमर जोड़ा है कि फिल्म घटनाओं का काल्पनिक संस्करण है,

सौ क्विंटल के तीन फल , अरे कैसे ?

May 10, 2023

सौ क्विंटल के तीन फल , अरे कैसे ? अरे ! सच आज मैं बहुत बड़ी सोच मे उलझ गयी

PreviousNext

Leave a Comment