Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

हथकड़ियाँ पहना दे….!!! -vijay lakshmi pandey

हथकड़ियाँ पहना दे….!!! प्रतिबन्धित जब हरी कलाई , हथकड़ियाँ      पहना   दे…!! कंगन  की    खन-खन  में  चूड़ी    …


हथकड़ियाँ पहना दे….!!!

hathkadiyan pehna de by vijay Lakshmi Pandey

प्रतिबन्धित जब हरी कलाई ,

हथकड़ियाँ      पहना   दे…!!

कंगन  की    खन-खन  में 

चूड़ी    की  छन – छन  में 

तेरी उलझन ,मेरी धड़कन

ये   तुझको  खूब    सुहाए 

तेरी      अनुमति     लेकर  

मदमस्त   रागिनी      गाए

इससे    तो  अच्छा   होगा 

तू  हथ कड़ियाँ पहना दे ..!!

प्रतिबन्धित जब हरी कलाई

हथकड़ियाँ     पहना   दे..!!

पायल  की   छम-छम में ,

घुँघुरु  की    छन-छन  में

धड़कन    बसती     तेरी

हसरत   जगती       मेरी

एहसान  तेरा,         मानूँ,

अफ़सोस ,मैं मैं न रही जानूँ..!!!

इससे  तो  अच्छा होगा,

तू  बेड़ी  एक बना    दे ..!!!

प्रतिबन्धित जब हरी कलाई

हथकड़ियाँ  पहना  दे  ..!!!

मलय पवन के  झोंके सी

परियों  के    संग    गाती 

रंग-बिरंगी तितली बनकर

फूल-फूल          इतराती

बड़े  सुहानें  सपनें   देखे

सपनों  से मुझे  जगा   दे

इससे  तो  अच्छा     होगा

जाल फेंककर धागों में उलझा दे..!!!

प्रतिबन्धित जब हरी कलाई

हथकड़ियाँ   पहना    दे..!!!

चंदा     जगे    गगन    में

सूरज  का  अपना   मेला

चंदा    तके  “विजय” को  

सूरज      जले    अकेला

तारा गण अपनीं मस्ती में

चमके अँधियारी बस्ती में

अँधियारी बस्ती में   कोई

फिर  से    दीप  जला  दे

इससे  तो  अच्छा    होगा

दिल में  जरा   जगह    दे..!!!

प्रतिबन्धित जब हरी कलाई

हथ      कड़ियाँ   पहना दे..!!!✍️

                   विजय लक्ष्मी पाण्डेय
                   एम. ए.,बी.एड.(हिन्दी)
                        स्वरचित मौलिक रचना
                        आजमगढ़,उत्तर प्रदेश


Related Posts

लेखिका वीना कह बुलाए दुनिया

May 14, 2023

लेखिका वीना कह बुलाए दुनिया कलम प्रखरव नहीं थी मेरी इसे प्रखरव बनाया है।।हर गहरा ज़ख़्म मेरा शब्दों में ज़हर

मातृदिवस विनयांजलि-मॉं मेरा जीवन आधार

May 11, 2023

मातृदिवस विनयांजलि-मॉं मेरा जीवन आधार मातृदिवस विनयांजलि तेरा नाम जुबां पे आते ही मेरे दर्द सभी थम जाते हैं ,माँ

हे मेरे ईश्वर अल्लाह, परवरदिगार मेरे मालिक

May 11, 2023

हे मेरे ईश्वर अल्लाह, परवरदिगार मेरे मालिक मैंने कहा गुनहगार हूं मैं उसने कहा बक्ष दूंगा मैंने कहा परेशान हूं

मेरे अपने ……. (Mere apne)

May 7, 2023

मेरे अपने ……. रिश्ते बंधे होते हैं, कच्चे धागे की डोर सेहमने तो संभाला बहुत, अपने रिश्तों कोपर रिश्तों की

एक कोशिश , जरिया बनने की

May 4, 2023

एक कोशिश , जरिया बनने की ज़हर जो उगले मेरी कलम छील के ये रख देती हैक्रोध कि ज्वाला धधक

कविता – अंधेरे की आवाज़ | Andhere ki awaz

April 26, 2023

अंधेरे की आवाज़  तालाब शांति में समुद्रीय हलचलविश्व का दूरस्थ प्रतिमान,जो नहीं खोज पाया खोज ही नहीं पायाकविता और कहानियों

PreviousNext

Leave a Comment