Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, poem

हजार है!/hazar hai

 हजार है! मोहब्बत की तलाश है, गम देने वाले हजार है! सच्चाई की तलाश है, झूठ बोलने वाले हजार है! …


 हजार है!

हजार है!/hazar hai

मोहब्बत की तलाश है,

गम देने वाले हजार है!

सच्चाई की तलाश है,

झूठ बोलने वाले हजार है!

अपनाने वालों की तलाश है,

अपेक्षा करने वाले हजार है!

ईमानदारी की तलाश है,

बेईमानी करने वाले हजार है!

प्रोत्साहन की तलाश है,

आलोचना करने वाले हजार है!

आखिरी दम तक साथ देने वाले की तलाश है,

अर्थी पर कंधा देने वाले हजार है!

आशा से भरा संसार है,

निराशा देने वाले भी हजार है,

पर हम नहीं कभी भी लाचार है,

खुदा ने दिया हमें काबिलियत का भंडार है,

क्यों ना स्वयं में यह सब तलाश करें,

बाहर तलाश करने वाले तो हजार है!!


डॉ. माध्वी बोरसे!

(स्वरचित व मौलिक रचना)

राजस्थान (रावतभाटा)


Related Posts

कितना कठिन होता है ना? माँ होना

June 23, 2022

 कितना कठिन होता है ना? माँ होना सिद्धार्थ गोरखपुरी बचपने से सबको खुश कर देना और जवां होना। बस उँगलियों

कविता – छाँव सा है पिता

June 23, 2022

 कविता – छाँव सा है पिता सिद्धार्थ गोरखपुरी गलतफहमी है के अलाव सा है पिता घना वृक्ष है पीपल की

कविता -आँखें भी बोलती हैं

June 23, 2022

 कविता -आँखें भी बोलती हैं सिद्धार्थ गोरखपुरी न जीभ है न कंठ है कहने का न कोई अंत है दिखने

कविता -गँवईयत अच्छी लगी

June 23, 2022

 कविता -गँवईयत अच्छी लगी सिद्धार्थ गोरखपुरी माँ को न शहर अच्छा लगा न न शहर की शहरियत अच्छी लगी वो

कविता – बचपन पुराना रे

June 23, 2022

 कविता – बचपन पुराना रे सिद्धार्थ गोरखपुरी ढूंढ़ के ला दो कोई बचपन पुराना रे पुराना जमाना हाँ पुराना जमाना

ये ख्वाब न होते तो क्या होता?

June 23, 2022

 कविता – ये ख्वाब न होते तो क्या होता? सिद्धार्थ गोरखपुरी झोपड़ी में रहने वाले लोग जब थोड़े व्यथित हो जाते

PreviousNext

Leave a Comment