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Dr_Madhvi_Borse, poem

स्वाभिमान है तेरा असली गहना।

स्वाभिमान है तेरा असली गहना। लिखना सिखा,पढ़ना सिखा,सबसे आगे बढ़ना सीखा,स्वाभिमान बचाना क्यों नहीं सीखा?स्वाभिमान बचाना क्यों नहीं सीखा? सहना …


स्वाभिमान है तेरा असली गहना।

लिखना सिखा,
पढ़ना सिखा,
सबसे आगे बढ़ना सीखा,
स्वाभिमान बचाना क्यों नहीं सीखा?
स्वाभिमान बचाना क्यों नहीं सीखा?

सहना सीखा,
लड़ना सीखा,
दर्द में भी मुस्कुराना सिखा,
स्वाभिमान बचाना क्यों नहीं सीखा?
स्वाभिमान बचाना क्यों नहीं सीखा?

जिम्मेदारियां सीखी,
हिस्सेदारीयां सीखी,
गिरते हुए उठना सिखा,
स्वाभिमान बचाना क्यों नहीं सीखा?
स्वाभिमान बचाना क्यों नहीं सीखा?

श्रृंगार सीखा,
बेहतरीन व्यवहार सीखा,
बरसों से देखे सपने तोड़ने सीखें,
स्वाभिमान बचाना क्यों नहीं सीखा?
स्वाभिमान बचाना क्यों नहीं सीखा?

स्वाभिमान है तेरा असली गहना,
लोगों की बातों में क्यों तुझे बहना,
बन जा निडर, नहीं अब सहना,
स्वाभिमान बचाना तुझे सीखना,
स्वाभिमान बचाना तुझे सीखना।

About author 

Dr. madhvi borse
डॉ. माधवी बोरसे
अंतरराष्ट्रीय वक्ता
स्वरचित मौलिक रचना
राजस्थान (रावतभाटा)

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