Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, poem

स्वाभिमान है तेरा असली गहना।

स्वाभिमान है तेरा असली गहना। लिखना सिखा,पढ़ना सिखा,सबसे आगे बढ़ना सीखा,स्वाभिमान बचाना क्यों नहीं सीखा?स्वाभिमान बचाना क्यों नहीं सीखा? सहना …


स्वाभिमान है तेरा असली गहना।

लिखना सिखा,
पढ़ना सिखा,
सबसे आगे बढ़ना सीखा,
स्वाभिमान बचाना क्यों नहीं सीखा?
स्वाभिमान बचाना क्यों नहीं सीखा?

सहना सीखा,
लड़ना सीखा,
दर्द में भी मुस्कुराना सिखा,
स्वाभिमान बचाना क्यों नहीं सीखा?
स्वाभिमान बचाना क्यों नहीं सीखा?

जिम्मेदारियां सीखी,
हिस्सेदारीयां सीखी,
गिरते हुए उठना सिखा,
स्वाभिमान बचाना क्यों नहीं सीखा?
स्वाभिमान बचाना क्यों नहीं सीखा?

श्रृंगार सीखा,
बेहतरीन व्यवहार सीखा,
बरसों से देखे सपने तोड़ने सीखें,
स्वाभिमान बचाना क्यों नहीं सीखा?
स्वाभिमान बचाना क्यों नहीं सीखा?

स्वाभिमान है तेरा असली गहना,
लोगों की बातों में क्यों तुझे बहना,
बन जा निडर, नहीं अब सहना,
स्वाभिमान बचाना तुझे सीखना,
स्वाभिमान बचाना तुझे सीखना।

About author 

Dr. madhvi borse
डॉ. माधवी बोरसे
अंतरराष्ट्रीय वक्ता
स्वरचित मौलिक रचना
राजस्थान (रावतभाटा)

Related Posts

हिंसा करना, मारपीट ही नहीं है-डॉ. माध्वी बोरसे

January 16, 2022

हिंसा करना, मारपीट ही नहीं है! जी, बहुत से घर में हम देखते हैं, जहां किसी का बहुत ज्यादा अपमान

इन्सानियत के पक्ष में- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 15, 2022

इन्सानियत के पक्ष मे क्या तुम सीखना चाहते होखुद कई दिन भूखे रहकरअनाज की कीमत समझना? खुद पर कोई जुल्म

अश्रु- जयश्री बिरमी

January 15, 2022

अश्रु बहते है अश्क ही आंखो के द्वार सेखुशी हो तो भी बहेंगे येगम में तो बहने का दस्तूर ही

हालात- जयश्री बिरमी

January 15, 2022

हालात मिलाना हाथ मुश्किल हैं बहुतगले लगाने की बात ही न कीजिएघूमने की ख्वाहिश बहुत हैंमगर बाहर निकलने की बात

एक अभिशाप- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 15, 2022

एक अभिशाप एक तरफ हैं…घर में बेटी के जन्म लेने परमायूस होने वाले लोग,लेकिन बेटे के जन्म परपूरे गांव, रिश्तेदारी

शेखियां बघारने का मौसम- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 15, 2022

शेखियां बघारने का मौसम चुनाव आ गये हैं और अब… देश को तरक्की की राह परले जाएगा कोई,तो कोई यहां

Leave a Comment