Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, poem

स्वयं को पहचाने!

स्वयं को पहचाने! चलो आज स्वयं को पहचाने,अपनी कमजोरियों को जाने,जग की आलोचना बहुत की,अब खुद को भी दे, थोड़े …


स्वयं को पहचाने!

स्वयं को पहचाने!
चलो आज स्वयं को पहचाने,
अपनी कमजोरियों को जाने,
जग की आलोचना बहुत की,
अब खुद को भी दे, थोड़े ताने!

कितने फेसिले, कितने संभले,
स्वार्थ में कितने किए हमले,
नजर डाल के खुद पर,
देखे हमारे सूखे गमले!

दूसरों की आलोचना में,
कितना हमने सुख लिया,
अब हमको सोचना है,
स्वयं को भी कितना दुख दिया!

चलो स्वयं पर डाले प्रकाश,
खुद से मिलने का करे प्रयास,
स्वयं में झांके, स्वयं को पहचाने,
स्वयं को सुधारे, स्वयं को जाने!

स्वयं की सकारात्मकता,
स्वयं को परखती,
स्वयं में जागरूकता,
स्वयं की शक्ति,
अपने जीवन में खुशियों की बहार लाए,
स्वयं को बेहतरीन से बेहतरीन इंसान बनाएं!!

डॉ. माध्वी बोरसे!
( स्वरचित व मौलिक रचना)
राजस्थान (रावतभाटा)


Related Posts

कन्यादान नहीं, कन्या-सम्मान।

August 30, 2022

कन्यादान नहीं, कन्या-सम्मान। यह कैसा शब्द है कन्यादान, कौन करता है अपनी जिंदगी को दान,माता- पिता की जान से बढ़कर,कैसे

हां मैं हूं नारीवादी!

August 28, 2022

हां मैं हूं नारीवादी! नारीवाद के प्रमुख प्रकार, स्‍त्रियों को पुरुषों के समान अधिकार,ऐसा विश्‍वास या सिद्घांत,भेदभाव का हो देहांत,और

खुद गरीब पर बच्चों को अमीर बनाते हैं पिता

August 28, 2022

कविता: खुद गरीब पर बच्चों को अमीर बनाते हैं पिता खुद गरीब पर बच्चों को अमीर बनाते हैं पिता  कभी

मार्ग स्वतः ही बनेगा।

August 25, 2022

मार्ग स्वतः ही बनेगा। प्रारंभ कर जीवन का सफर,त्याग दे आलस का जहर,बस एक बार आरंभ करना है जरूरी,तेरे हित

कब प्रशस्त होगी हर नारी

August 25, 2022

“कब प्रशस्त होगी हर नारी” अब एक इन्कलाब नारियों की जिजीविषा के नाम भी हो, तो कुछ रुकी हुई ज़िंदगियाँ

वजह-बेवजह रूठना

August 25, 2022

वजह-बेवजह रूठना। वजह-बेवजह क्यों बार-बार रूठना,छोटी-छोटी बातों पर बंधनों का टूटना,क्यों ना जीवन में समझदारी दिखाएं,शिष्टाचार, प्रेम और स्वाभिमान के

PreviousNext

Leave a Comment