Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, vijay_lakshmi_pandey

सूरज दादा- विजय लक्ष्मी पाण्डेय

सूरज दादा सूरज दादा उठा के गठरी, चले कुम्भ के मेला में।बसन्त पंचमी नहा केआउँ,दिन बीता बहुत झमेला में।।लुका छिपी …


सूरज दादा

सूरज दादा- विजय लक्ष्मी पाण्डेय
सूरज दादा उठा के गठरी,

चले कुम्भ के मेला में।
बसन्त पंचमी नहा केआउँ,
दिन बीता बहुत झमेला में।।
लुका छिपी कर चंदा जाए,
लिए बिछौना तारों की।
साथ चली है बरखा रानी,
है टोली ये मस्तानों की।।
खेत बाग़ वन कुम्भ नहाते,
ठिठुर रहा है घर आँगन।
नन्हें-नन्हें नौनिहाल,
बेहाल हुए सूरज दादा बिन।।
साथ हवाएँ चली बसन्ती,
गंगा ,सरयू, हरिद्वार तट ।
एक साथ सब कुंभ नहाते,
हर-हर गंगे महादेव कर।।
तिलक लगाकर सिंदूरी,
वह सूरज दादा है आया।
मुदित दिशाएँ महक उठीं,
खुशनुमा भव्य कंचन काया।।
दे ताशे,ताल, ढोल,झाँझरी,
बजा बजा रंग बरसाऊँ।
कुम्भ नहा सूरज आया है,
उत्सव”विजय”फागुनी गाऊँ।।

विजय लक्ष्मी पाण्डेय
एम. ए., बी.एड.(हिन्दी)
स्वरचित मौलिक रचना
आजमगढ़,उत्तर प्रदेश


Related Posts

बताओ न कैसे रहते हो ?–सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 6, 2022

सड़क किनारे रहने वाले ग़रीब बेघरों को समर्पित रचना-बताओ न कैसे रहते हो मौसम ठंडा सूरज मद्धमऊपर से बदन पर

नई आस- जयश्री बिरमी

January 6, 2022

नई आस बहुत दिनों के बाद अब जगी हैं एक नई आसहर्षोल्लास के दिन भी थे ये दिलाती हैं एहसास

प्रीतम परदेशी- विजय लक्ष्मी पाण्डेय

January 6, 2022

प्रीतम परदेशी“आल्हा राग” शिशिर ऋतु की सबसे बैरी, पूस मास अँधियारी रात।ता में अरुण गयो दक्षिण दिशि,घन घमण्ड नभ घिरा

अलविदा- सुधीर श्रीवास्तव

January 6, 2022

अलविदा अब तुम जा रहे होन तनिक सकुचा रहे हो,लगता है बड़े बेशर्म हो गये हो।जाओ न हम भी कहां

जन्म सफल हो जायेगा-अंकुर सिंह

January 6, 2022

*जन्म सफल हो जायेगा* मिला मानव जीवन सबको, नेक कर्म में सभी लगाएं।।त्याग मोह माया, द्वेष भाव,प्रभु भक्ति में रम

नववर्ष की चुनौतियां और तैयारियां- सुधीर श्रीवास्तव

January 6, 2022

नववर्ष की चुनौतियां और तैयारियां नववर्ष के साथ नयी नयीचुनौतियां भी कम नहीं है, ओमीक्रान पहले से ही डरा रही

Leave a Comment