Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

सूनापन अखरता”- अनीता शर्मा

सूनापन अखरता अकेले चुपचाप खड़ी हो ,देख रही थी,जहाँ दुनिया बसती थी । सूनापन पसरा था कमरे में,जहाँ रौनक रहती …


सूनापन अखरता

सूनापन अखरता"- अनीता शर्मा

अकेले चुपचाप खड़ी हो ,
देख रही थी,जहाँ दुनिया बसती थी ।

सूनापन पसरा था कमरे में,
जहाँ रौनक रहती थी ।

अंधियारा छाया था बंद कमरे में,
जहाँ उजियारा चहल-पहल होती थी।

बहुत अखरा था सूनापन मुझको,
बहुत अकेलापन लगता है।

जीवन में अकल्पनीय घटित हुआ,
सिर से हाँथ हटा माता पिता का ।

कितने स्नेहिल मातृ-पितृ कवच था,
हर विपदाओं का हल मिलता था।

निष्ठुर काल एक-एक कर निगल गया,
मेरे प्रिय जन मुझसे छीने ।

कसमसाहट हृदय वेदना बेबसी का,
दे गया काल छटपटाने हमेशा।

बेहद वेदनीय घड़ी थी,नयन अश्रु भरे 
पलकों ने अश्रु पीकर सुखा दिये थे।

चलचित्र से पल गुजर रहे थे और,
बाहर खामोशियां पसरी थी।!

—–अनिता शर्मा सुधा नर्सिग होम झाँसी
—–मौलिक रचना


Related Posts

कैलेण्डर बदल जाएगा- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

कैलेण्डर बदल जाएगा बदलता आ रहा है जैसेसैंकड़ों सालों सेवैसे ही यह साल भी बदल जाएगा,कुछ यादें खट्टी – मीठीदर्ज

आम जनता का नसीब- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

आम जनता का नसीब आम जनता के लिएधर्मस्थलों पर ईश्वर के दर्शन हेतूप्रक्रिया अलग हैऔर ‘वी.आई.पी.’ के लिए अलग, जनता

सोचो जरा उनके बारे में भी- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

सोचो जरा उनके बारे में भी तुम दुखी होकि इन सर्दियों में महंगीब्रांडेड रजाई नहीं खरीद पाए,जिन्हें मयस्सर नहींकड़कती सर्दी

इंसानियत को बचाओ- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

इंसानियत को बचाओ दुनिया मेंकहीं भी हो रहा हो अन्यायतो उसके खिलाफ आवाज उठाओ,रोकने की उसे करो पुरजोर कोशिशेंविरुद्ध उसके

सिखाने की कोशिश करें- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

सिखाने की कोशिश करें सिखाने की कोशिश करेंअपने बच्चों को खाना बनाना भीपढ़ाई के साथ-साथ,वरना लाखों के पैकेज पाने वालों

मृगतृष्णा है तुम्हारा साथ- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

मृगतृष्णा है तुम्हारा साथ ‘तुम्हारा साथ’ मेरे लिएहै एक तरह कीमृगतृष्णा सा,दूर कहीं झिलमिलाताहुआ साबुलाता है मुझे अपने पास,तुम्हारे दुर्निवार

Leave a Comment