Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Chanda_rawat, poem

सुबह- चन्दा नीता रावत

। । सुबह ।। सुबह सवेरे जब रात ढले सूर्य की किरणें पृथ्वी पर आतीपृथ्वी के हरे चादर पर लालिमा …


। । सुबह ।।

सुबह- चन्दा नीता रावत
सुबह सवेरे जब रात ढले

सूर्य की किरणें पृथ्वी पर आती
पृथ्वी के हरे चादर पर लालिमा
बिखरें जाती है
नीले गंगन मे सतरंगी रूप दिखाती है
पक्षियों की मधुर वाणी
हृदय को मंत्र मुक्त कर जाती है

चमकीले ओस के मोती
पडतें,पौधो पर,
कलियां पुष्प बन जाती है
विश्व इत्र से महक जाती है
सृष्टि के बदलते रुप से
मन मोहित हो जाता है

सुबह सवेरे रात ढले जब 

सूर्य की किरणें पृथ्वी पर आती है
देख ये दृश्य,सृष्टि के अतरंगी रुप,से
मन मोहित हो जाता है
हृदय तृप्त हो जाता है

चन्दा रावत
औरंगाबाद वाराणसी


Related Posts

क्यों एक ही दिन मां के लिए

May 8, 2022

क्यों एक ही दिन मां के लिए मोहताज नहीं मां तुम एक खास दिन कीतुम इतनी खास हो कि शायद

सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास

May 8, 2022

सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास  मां शब्द का विश्लेषण शायद कोई कभी नहीं कर पाऐगा, यह दो

मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं

May 7, 2022

“मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं” जिस कोख में नौ महीने रेंगते मैं शून्य

माँ तेरे इस प्यार को

May 7, 2022

माँ तेरे इस प्यार को तेरे आँचल में छुपा, कैसा ये अहसास ।सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो

बीते किस्से

May 7, 2022

बीते किस्से अपनी जिंदगी के कुछ नायाब किस्से मैं सुनाती हूंलोग कहते मुझे पागल , मैं तो कलम कि दीवानी

कविता-दर्द ने दस्तक दी

May 6, 2022

दर्द ने दस्तक दी आज फिर दर्द ने मेरे दिल पर दस्तक दे दी हमें यू ना रुलाओ… 2मैं इस

PreviousNext

Leave a Comment