सुनो दिकु…..
तुम हो तो जीवन की खूबसूरती है
तुम हो तो सांसो में ताजगी है
तुम्हारे बिना हर महफ़िल अधूरी
तुम हो तो अंधेरों में भी रोशनी है
ना कोई तत्व मिटा सका तुम्हारी यादों को
ना कोई समां भुला सका तुम्हारी बातों को
प्रेम का इंतज़ार अपनी दिकु के लिये
सुनो दिकु….. तुम हो तो जीवन की खूबसूरती हैतुम हो तो सांसो में ताजगी है तुम्हारे बिना हर महफ़िल अधूरीतुम …
तुम हो तो जीवन की खूबसूरती है
तुम हो तो सांसो में ताजगी है
तुम्हारे बिना हर महफ़िल अधूरी
तुम हो तो अंधेरों में भी रोशनी है
ना कोई तत्व मिटा सका तुम्हारी यादों को
ना कोई समां भुला सका तुम्हारी बातों को
प्रेम का इंतज़ार अपनी दिकु के लिये
November 22, 2021
गुरुनानक जी कार्तिक मास में संवत पन्द्रह सौ छब्बीस को माँ तृप्ता के गर्भ से कालू मेहता के आँगन तलवंडी,
November 22, 2021
राजनीति की जीत राजनीति की जीत है यह लोकतंत्र की जीत का मत दो इसे नाम, पहले-पहल जब उठी थी
November 22, 2021
बंदर और इंसान एक दिन सारे बंदर अपने आपको इंसान घोषित कर देंगे इंसानों के ऊपर इतिहास के साथ छेड़खानी
November 17, 2021
स्वप्न उजले हैं. स्वप्न उजले हैं ये कह रहा है कोई। उकेरना चाहता है हकीकत कोई। हकीकत को हकीकत होने
November 17, 2021
मंजिल भूल जाना किसी तरह से जो राह की रूकावट है सजा लेना माथे पे सदा ही जो जिन्दगी की
November 17, 2021
पीड़ा खोने की तेरी तोड़ चली हर रस्मों को तेरा पथ ज्योतिर्मय है, मेरा क्या मैं रहा अकेला, कौन सुनेगा